देश

क्या बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पलटी मारेंगे नीतीश कुमार? जीतन राम मांझी ने किया बड़ा दावा

Bihar Politics: क्या बिहार में फिर से एक बार सियासी खेला होने वाला है? एक बार फिर ये सवाल तेज होने लगा है। लालू यादव ने जबसे नीतीश के लिए दरवाजे खुले होने की बात कही है, उसे बाद से ये चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच जीतन राम मांझी ने कहा है कि नीतीश कुमार एनडीए के साथ हैं और रहेंगे।

Image

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार

Nitish Kumar's Plan for Bihar Chunav: नीतीश कुमार क्या बिहार विधानसभा चुनाव से पहले फिर पाला बदलने का मन बना रहे हैं? ये सवाल इन दिनों एक बार फिर बिहार का सबसे बड़ा सवाल हो गया है। इस बीच हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह से एनडीए के साथ हैं और एनडीए के साथ ही रहेंगे।

'नीतीश कुमार एनडीए के साथ पहाड़ की तरह डटे हुए हैं'

बोधगया स्थित अपने आवास पर रविवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि नीतीश कुमार एनडीए के साथ पहाड़ की तरह डटे हुए हैं। उन्होंने कई बार यह बात कही है। वह (नीतीश कुमार) तेजस्वी यादव के साथ क्यों जाएंगे, जिनके कार्यकर्ता ने यहां जमीन हड़प ली है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के गुंडे-मवाली लोगों ने गरीबों को दी हुई पर्चे की जमीन लूट ली। नीतीश कुमार ने बिहार में सुशासन की सरकार चलाई है, वह अपना नाम तेजस्वी यादव के साथ जाकर क्यों बदनाम करेंगे। तेजस्वी के साथ जाकर वह कभी भी 2005 के पहले वाली स्थिति में बिहार को नहीं जाने देंगे।

जीतन राम मांझी का दावा- दिल्ली में एनडीए की सरकार बनेगी

छत्तीसगढ़ में पत्रकार की हत्या पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पत्रकार निर्भीक होकर सच को सामने लाए होंगे इसीलिए उनकी हत्या की गई है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि इसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है। हम मांग करते हैं कि उनके आश्रितों को सरकारी लाभ और नौकरी दी जाए। दिल्ली चुनाव से जुड़े एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा, "दिल्ली में एनडीए की सरकार बनेगी। केजरीवाल जो लुभावने वादे कर रहे हैं, उसे जनता समझ रही है। दिल्ली में जनता के लिए कुछ काम नहीं किए गए हैं। वह पिछले नारे को भूल गए हैं। केजरीवाल खुद दिल्ली में गठबंधन नहीं बचा पाए। कांग्रेस और उनकी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।"

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के अनिश्चितकालीन अनशन से जुड़े एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि प्रशांत किशोर छात्रों को उकसाकर राजनीति कर रहे हैं। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) अपना स्टैंड रखकर परीक्षा ले रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article