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'तो बंद कर देंगे राजमार्ग परियोजनाएं', नितिन गडकरी ने भगवंत मान से क्यों कह दी ये बात

Gadkari Slams CM Mann : नितिन गडकरी ने पंजाब सरकार से कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो राजमार्ग परियोजनाएं बंद कर देंगे। उन्होंने भगवंत मान को चेतावनी भरा पत्र लिखा। उन्होंने लुधियाना की एक घटना की ओर इशारा किया, जिसमें इंजीनियर पर बेरहमी से हमला किया गया था।

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नितिन गडकरी ने पंजाब सरकार को चेताया।

Nitin Gadkari on Punjab Sarkar: पंजाब में अगर कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो एनएचएआई के पास राज्य की आठ राजमार्ग परियोजनाओं को रद्द या बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लिखे पत्र में यह चेतावनी दी है। इस परियोजनाओं की कुल लंबाई 293 किलोमीटर है और लागत 14,288 करोड़ रुपये है।

'अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत'

गडकरी ने कहा कि उन्हें दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर हाल में हुई दो घटनाओं के बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने नौ अगस्त को लिखे अपने पत्र में कहा, 'जालंधर जिले में एक घटना में ठेकेदार के इंजीनियर पर बेरहमी से हमला किया गया। हालांकि, इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।'

अभी तक नहीं दर्ज की गई है एफआईआर

मंत्री ने लुधियाना जिले में एक और घटना की ओर इशारा किया, जहां दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के ठेकेदार के परियोजना कैंप पर उपद्रवियों ने हमला किया और इंजीनियरों को धमकी दी। इस घटना में एनएचएआई अधिकारियों के लिखित अनुरोध के बावजूद अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और उपद्रवियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

परियोजनाओं को करने की दे दी चेतावनी

गडकरी ने कहा, 'यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो एनएचएआई के पास 14,288 करोड़ रुपये की लागत और 293 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली आठ अन्य गंभीर रूप से प्रभावित परियोजनाओं को रद्द/बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।' उन्होंने लिखा कि यह ध्यान देने योग्य है कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित लंबित मुद्दों और मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण कई ठेकेदारों ने अनुबंधों को बंद करने का अनुरोध किया है और एनएचएआई के खिलाफ दावे किए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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