Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन देखने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में प्रमुख पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अखाड़े ने केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि मौजूदा ट्रस्ट का पुनर्गठन करके इसे एक "पब्लिक ट्रस्ट" (सार्वजनिक ट्रस्ट) बनाया जाए। निर्मोही अखाड़े ने यह याचिका महंत राजा रामचंद्रचार्य अतीत गुरु रघुनाथ दास के जरिए दायर की है।
याचिका में निर्मोही अखाड़े की प्रमुख मांगें
अखाड़े का आरोप है कि मौजूदा ट्रस्ट एक "प्राइवेट ट्रस्ट" की तरह काम कर रहा है, जो नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले की भावना और मंशा के खिलाफ है। याचिका में मांग की गई है कि ट्रस्ट के फैसलों की निगरानी का अधिकार 'रामानंदी बैरागी संप्रदाय' के संतों को दिया जाए और इसके लिए ट्रस्ट के ढांचे में सुरक्षा उपाय शामिल किए जाएं।
अखाड़े ने मांग की है कि 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को कुर्क (attached) की गई श्री राम लला विराजमान की मूल मूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह में वापस स्थापित किया जाए। अखाड़े का कहना है कि ट्रस्ट के पास मूल मूर्तियों को बदलने या हटाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। मंदिर में सभी अनुष्ठान, सेवा, भोग और धार्मिक समारोह पूरी तरह से रामानंदी संप्रदाय और निर्मोही अखाड़े के ऐतिहासिक रीति-रिवाजों के अनुसार ही आयोजित किए जाएं।
वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों पर फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
निर्मोही अखाड़े ने कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति के गठन की मांग की है जो यह जांच करे कि 2019 के फैसले के निर्देशों का पालन ट्रस्ट द्वारा पूरी ईमानदारी से किया गया है या नहीं। इसके साथ ही, अखाड़े ने ट्रस्ट के अब तक के सभी वित्तीय और संपत्ति से जुड़े लेन-देन की फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी गुहार लगाई है।
चढ़ावे में हेराफेरी का हवाला: याचिका में कहा गया है कि हाल ही में राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए कैश और कीमती सामानों में बड़े पैमाने पर गबन (embezzlement) के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसकी जांच उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) कर रही है। अखाड़े के मुताबिक, ये घटनाएं दर्शाती हैं कि बिना किसी जवाबदेही और निगरानी के काम कर रहे मौजूदा ट्रस्ट के कारण एक सार्वजनिक धार्मिक बंदोबस्त की सुरक्षा में गंभीर विफलता हुई है।
20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
सुंप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 के अपने ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था और केंद्र को ट्रस्ट बनाने व मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था। अब, राम मंदिर के चंदे में हुई कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करने वाली कई अलग-अलग याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल यानी 20 जुलाई को सुनवाई करने जा रहा है। निर्मोही अखाड़े की इस नई याचिका के बाद इस मामले में कानूनी सरगर्मी और बढ़ गई है।
