National Conference Crisis: जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर राजनीतिक संकट और गहराता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को श्रीनगर के हमहामा में लोलाब के विधायक क़ैसर जमशीद लोन के आवास पर बैठक करने वाले पार्टी के 25 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है और अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
सूत्रों के अनुसार, 30 अक्टूबर को तैयार किया गया यह ज्ञापन सरकार और पार्टी नेतृत्व के कामकाज को लेकर विधायकों की बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है। इसमें कथित तौर पर कहा गया है कि 'जनता की अपेक्षाओं और सरकार के कामकाज के बीच लगातार दूरी बढ़ रही है।' विधायकों ने कथित कुशासन, जवाबदेही की कमी और महत्वपूर्ण नीतिगत एवं राजनीतिक मामलों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों से पर्याप्त विचार-विमर्श न किए जाने पर चिंता जताई है।
मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और बदलाव की मांग
सूत्रों ने बताया कि विधायकों ने मंत्रियों के कामकाज की व्यापक समीक्षा, गैर-प्रदर्शनकारी मंत्रियों को बदलने, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी से सड़क एवं भवन (R&B) विभाग वापस लेने की मांग की है।
ज्ञापन में 3 जून को दाचीगाम में हुई बैठक में पारित प्रस्तावों को लागू करने, सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच और अनुभवी विधायकों को शामिल करते हुए एक परामर्श तंत्र स्थापित करने की मांग भी की गई है।
राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए नए सिरे से आंदोलन की मांग
सनद रहे कि विधायकों की मांगें केवल मंत्रिमंडल में फेरबदल और मंत्री पदों तक सीमित नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और उसकी संवैधानिक पहचान की रक्षा के लिए नए सिरे से राजनीतिक संघर्ष शुरू करने की मांग की है। इसके तहत जनसभाओं, विरोध रैलियों और संसद में हस्तक्षेप के माध्यम से समन्वित राजनीतिक लामबंदी का प्रस्ताव रखा गया है।
चुनावी घोषणापत्र लागू करने पर भी जोर
विधायकों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनावी घोषणापत्र को समयबद्ध तरीके से लागू करने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि घोषणापत्र के क्रियान्वयन को लेकर विधायकों के साथ अब तक कोई सार्थक संस्थागत परामर्श या व्यापक समीक्षा नहीं की गई है।
ज्ञापन के अंतिम हिस्से में विधायकों ने कहा है कि संगठन की ताकत सामूहिक नेतृत्व, आपसी विचार-विमर्श, पारदर्शिता और जवाबदेही में निहित है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पार्टी निर्वाचित प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
असंतोष दूर करने में जुटा पार्टी नेतृत्व
इस बीच, सूत्रों का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को शांत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम पार्टी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने एक और राजनीतिक चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है। श्रीनगर से पार्टी सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के 3 नवंबर को पार्टी से इस्तीफा देने के साथ-साथ श्रीनगर लोकसभा सीट की सदस्यता छोड़ने की भी संभावना जताई जा रही है। उनका प्रस्तावित इस्तीफा पार्टी के मौजूदा राजनीतिक संकट को और गहरा सकता है। ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस को एक ओर अपने विधायकों के बीच बढ़ते असंतोष और दूसरी ओर अपने प्रमुख संसदीय प्रतिनिधियों में उभरती नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।
