INDIA Bloc Rally: हल्की धूप और मध्यम हवा के साथ राष्ट्रीय राजधानी का सियासी मौसम रविवार की सुबह सुहावना रहा, लेकिन गर्मजोशी वाली सियासत शाम होते-होते तल्ख हो गई। खिलखिलाती धूप के बीच रामलीला मैदान से विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भाजपा पर तीखा प्रहार किया। ऐसे में भला भाजपा कहां चुप बैठने वाली थी। उसने बिना किसी देरी के रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने के दावे को चुनौती दे डाली।
रामलीला मैदान की रैली में भीड़ को लेकर विपक्ष और भाजपा के दावों के बीच विवाद देखने को मिला। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और रैली से पहले मार्च निकाल रहे विपक्षी नेताओं के साथ-साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर भी पुलिस की नजर रही।
मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक विपक्षी नेताओं का मार्च
'वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली' से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और राजद नेता तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला।
इस मार्च में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, माकपा नेता एमए बेबी, भाकपा नेता डी राजा, भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी हिस्सा लिया, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त और भाजपा के खिलाफ जोरो-शोरो से नारेबाजी हुई। इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
समर्थकों का हुजूम और कछुए की चाल
मिंटो रोड से रामलीला मैदान की दूर एक से डेढ़ किलोमीटर के आसपास है, लेकिन विपक्षी नेताओं के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के हुजूम से सड़क पटी रही। ऐसे में रामलीला मैदान तक मार्च को पहुंचने में तकरीबन 2.5 घंटे का समय लगा। इस रैली की सबसे खास बात यह रही कि विपक्षी एकजुटता महज नेताओं के मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग राज्यों से आए कार्यकर्ता भी एक साथ 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाते दिखाई दिए।

मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक विपक्षी दलों का मार्च
ढोल-नगाड़ों, डफली, बैनर और पोस्टरों के जरिए विरोध जताया गया। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समर्थक भी आकर्षण का केंद्र रहे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने नुक्कड़ नाटकों और कार्टून वाले बैनरों के जरिए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कर्नाटक से आए कुछ प्रदर्शनकारी कई मीटर लंबा कपड़े का बैनर लेकर पहुंचे। दावा किया गया कि इस बैनर में मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम लिखे गए हैं।
'जेल जाएंगे ज्ञानेश कुमार'
रामलीला मैदान पर मौजूद भीड़ राहुल गांधी को सुनने का बेसब्री से इंतजार करती रही। तमाम विपक्षी नेताओं के वक्तव्य के बाद आखिर में आए राहुल गांधी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा सीईसी ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला और कहा, ''देशद्रोह के लिए ज्ञानेश कुमार अपने पद से हटेंगे एवं जेल जाएंगे तथा मोदी और शाह को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।''
साथ ही, राहुल गांधी ने दावा किया कि सीईसी देश का गला घोंटने का अपराध करने के कारण रात में सो नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि मोदी और शाह भी रात में सो नहीं पा रहे हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी
भाजपा पर अखिलेश का तीखा तंज
रैली को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग 'अंगद का पैर' कहने की बात करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि जब जमीन ही नहीं बची है तो पैर कहां रखेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि काशी की जनता ने 'डबल इंजन' की सरकार को 'डबल जीरो' दिया है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए सपा प्रमुख ने कहा, ''जब रामलीला मैदान में जनसभा होने जा रही थी तो उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि 1.27 करोड़ हिंदू भाइयों के वोट काट दिए गए हैं। यानी हर विधानसभा में 31 हजार वोट कम हुए हैं।''
खचाखच भरा रहा रामलीला मैदान
राहुल गांधी समेत 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं ने रामलीला मैदान में आयोजित रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई और कांग्रेस द्वारा जारी की गईं तस्वीरों और वीडियोज में रामलीला मैदान खचाखच भरा हुआ दिखाई दिया। हालांकि, रैली के बाद अभी तक ऐसा कोई भी डेटा सामने नहीं आया, जिसमें यह बताया गया हो कि आखिर कितने लोग मार्च और रैली में शामिल हुए।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने पलटवार करते हुए विपक्षी नेताओं की 'इंडिया' गठबंधन की रैली को 'अराजक और अनुशासनहीन तमाशा' बताया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने रामलीला मैदान में विपक्षियों के शक्ति प्रदर्शन को कमतर आंकते हुए कहा कि केसी वेणुगोपाल सहित कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि रैली में 10 लाख लोग भाग लेंगे, लेकिन वहां केवल "मुट्ठी भर" लोग ही आए।
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस की ओर से रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने के दावे किए गए थे, जबकि रामलीला मैदान लगभग 10-12 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें करीब 15 प्रतिशत स्थान मंच और उसके आगे बने 'डी' ने घेर रखा था। रामलीला मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह खाली था। वहां न तो कोई कुर्सी लगाई गई थी और न ही कोई व्यक्ति मौजूद था। कुल मिलाकर, रामलीला मैदान में लगभग 28 हजार कुर्सियां लगाई गई थीं, जिनमें से 5-7 हजार कुर्सियां पूरी तरह खाली थीं।
चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा
विपक्षियों की रैली के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। रैली की निगरानी के लिए 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती और 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आयोजन स्थल को 14 जोन में बांटा गया है। इसके अलावा, ड्रोन से निगरानी, शरीर पर लगाए जाने वाले कैमरे, दंगा नियंत्रण वाहन और एक समर्पित नियंत्रण कक्ष का भी इंतजाम किया गया।
हिरासत में लिए गए 100 से अधिक विद्यार्थी
इस बीच, एसआईआर के विरोध में कनॉट प्लेस की ओर मार्च कर रहे कम से कम 100 विद्यार्थियों को दिल्ली पुलिस ने रविवार को मिंटो रोड पर रोककर हिरासत में ले लिया। इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान छात्र संगठन दिशा ने किया था। संगठन ने एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। विद्यार्थी मिंटो रोड से कनॉट प्लेस की ओर मार्च कर रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया और आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
