Traffic Challan: दिल्ली पुलिस की साउथ-वेस्ट जिला साइबर थाना पुलिस ने फर्जी ट्रैफिक चालान के मैसेज भेजकर लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक फर्जी रिवॉर्ड ऐप के जरिए 41 हजार से ज्यादा लोगों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया। इस नेटवर्क से देशभर में दर्ज 544 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिली हैं, जिनमें 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ठगी गई है।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत एक व्यक्ति की शिकायत से हुई थी। पीड़ित को मोबाइल पर ट्रैफिक चालान भरने के नाम पर एक मैसेज मिला था। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उसके क्रेडिट कार्ड से 2.21 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी हो गई। इस संबंध में 28 नवंबर 2025 को साइबर थाना साउथ-वेस्ट जिले में ई-एफआईआर दर्ज की गई थी।
सामने आया विंगो कैश ऐप का घपला
जांच के दौरान पुलिस को 'विंगो कैश' नाम के एक ऐप के बारे में पता चला। यह ऐप लोगों को रिवॉर्ड और बोनस देने का लालच देता था। जब कोई व्यक्ति इस ऐप के जरिए अपना रिवॉर्ड रिडीम करता था तो उसका मोबाइल फोन करीब 30 सेकंड के लिए लॉक हो जाता था। इसी दौरान ऐप अपने आप 9 से 12 SMS भेज देता था। इसके बदले यूजर को महज 1 से 3 रुपये मिलते थे।
इन SMS में फर्जी ट्रैफिक चालान भरने, डिलीवरी का पता अपडेट करने और रिवॉर्ड प्वाइंट हासिल करने के लिंक होते थे। लोग चंद रुपये कमाने के लालच में अपने मोबाइल का इस्तेमाल होने दे रहे थे, जबकि उनके फोन से हजारों फर्जी मैसेज भेजे जा रहे थे। पुलिस को जांच में ऐसे 3300 से ज्यादा फिशिंग SMS का पता चला।
तीन दिन में 41 हजार लोगों को बांटे करीब 2 करोड़ रुपये
पुलिस की जांच में इस नेटवर्क का वित्तीय लेन-देन सामने आया तो अधिकारी भी हैरान रह गए। रिवॉर्ड ऐप के जरिए लोगों को दिए जा रहे छोटे-छोटे भुगतानों की जांच की गई तो पता चला कि महज तीन दिनों में 41 हजार से ज्यादा यूजर्स को करीब 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
यह रकम मुंबई की श्री बालाजी एंटरप्राइजेज नाम की फर्म के बैंक खाते से भेजी जा रही थी। इस खाते को राजस्थान के उदयपुर निवासी मोती सिंह बघेला कथित तौर पर संचालित कर रहा था। पुलिस ने उसे मुंबई से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपने सहयोगियों के बारे में जानकारी दी, जो फर्जी कंपनियों के दस्तावेज तैयार कराने और बैंक खाते खुलवाने में मदद करते थे।
कुवैत के बैंक तक पहुंचा ठगी की रकम का कनेक्शन
पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम का पता लगाने के दौरान एक बैंक खाते का लिंक कुवैत के नेशनल बैंक ऑफ कुवैत तक पहुंचा। विदेश में मौजूद बैंक खाते के कारण ठगी के नेटवर्क तक सीधे पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। इसके बाद पुलिस ने रिवॉर्ड ऐप के जरिए किए जा रहे भुगतान और बैंक खातों की जांच शुरू की। इसी जांच में कई ऐसे बैंक खाते सामने आए, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसे के लेन-देन और रिवॉर्ड भुगतान के लिए किया जा रहा था।
फर्जी कंपनी और बैंक खाते खुलवाने वाले भी गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस ने हरदोई के रहने वाले हरषपाल को लखनऊ से गिरफ्तार किया। वह एक बैंक खाते को संचालित कर रहा था। उसके पास से पांच मोबाइल फोन, 21 डेबिट कार्ड, 22 चेकबुक और पासबुक, अलग-अलग कंपनियों की 10 मुहरें, चार QR स्कैनर, एक कार और सोने की चेन बरामद हुई।
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इसके बाद पुलिस ने दिल्ली के दयालपुर निवासी विक्की को गिरफ्तार किया। वह दिल्ली और नोएडा में कमीशन लेकर बैंक खाते खुलवाने और उनके लिए जरूरी दस्तावेज व अन्य सामान जुटाने का काम करता था। उसके पास से 37 डेबिट कार्ड, 30 चेकबुक और पासबुक, पांच POS मशीन और चार QR स्कैनर बरामद किए गए।
पुलिस ने राजस्थान के उदयपुर से विशाल दास वैष्णव को भी गिरफ्तार किया। उस पर श्री बालाजी एंटरप्राइजेज नाम की फर्म बनवाने और कमीशन लेकर उसका बैंक खाता खुलवाने का आरोप है। वहीं पंजाब के मलेरकोटला से ब्रजेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। वह SK SPORTS नाम की फर्म के नाम पर दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक खाता खुलवाने में मदद कर रहा था।
15 मोबाइल फोन समेत बड़ी संख्या में बैंकिंग सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 15 मोबाइल फोन और टैबलेट, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक और चेकबुक, 14 कंपनियों की मुहरें, पांच POS मशीन, आठ QR स्कैनर, एक कार और एक सोने की चेन बरामद की है।
पुलिस के मुताबिक, अब तक देशभर में दर्ज 544 साइबर अपराध की शिकायतों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। इन शिकायतों में 10 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम सामने आई है। मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों के जरिए आगे भेजी गई।
