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नासिक BPO मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने गंभीर मीडिया रिपोर्टों का स्वतः लिया संज्ञान

NCW on Nashik BPO Case: राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित (TCS) के बीपीओ यूनिट में महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया है।

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राष्ट्रीय महिला आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः लिया संज्ञान (AI Image)

NCW on Nashik BPO Case: राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित (TCS) के बीपीओ यूनिट में महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, धार्मिक प्रथाओं से संबंधित एक शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच में कुछ पर्यवेक्षी पदों पर कार्यरत व्यक्तियों द्वारा महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म तथा जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, आयोग ने राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 8 के अंतर्गत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए एक तथ्य-जांच समिति (Fact-Finding Committee) का गठन किया है, जो इस घटना की विस्तृत जांच करेगी। यह समिति 18 अप्रैल 2026 को घटनास्थल का दौरा करेगी।

समिति में बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व डीजीपी बी के सिन्हा तथा सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा शामिल हैं। आयोग की वरिष्ठ समन्वयक सुश्री लीलाबती समिति के कार्यों के समन्वय में सहयोग करेंगी।

वहीं नासिक BPO मामले में पुलिस का कहना है कि HR मैनेजर और AGM ने उत्पीड़न के आरोपों वाले 70 से ज़्यादा मैसेज को नजरअंदाज किया; SIT संभावित मनी ट्रेल की जांच कर रही है। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बुधवार को बताया कि TCS ब्रांच में नासिक उत्पीड़न मामले के आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ितों की बार-बार की गई शिकायतों को नजरअंदाज किया और उन्हें कंपनी के आला अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार, HR मैनेजर निदा खान कथित 'मास्टरमाइंड'

पुलिस के अनुसार, HR मैनेजर निदा खान कथित 'मास्टरमाइंड' हैं, जिन्होंने शिकायत को दबाने और कथित तौर पर आरोपी को बचाने की कोशिश की। जांच के दौरान, पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों के बीच हुए लगभग 78 'संदिग्ध' कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट बरामद किए। पुलिस को संभावित वित्तीय लेन-देन के भी सबूत मिले हैं।

'वे इस मामले को यहीं खत्म कर दें'

पुलिस के अनुसार, HR मैनेजर ने पीड़ितों से बार-बार कहा कि वे इस मामले को यहीं खत्म कर दें, और ऑफिस में POSH (यौन उत्पीड़न की रोकथाम) कमेटी का सदस्य होने के बावजूद उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस बीच, पुलिस सूत्रों ने बताया कि TCS नासिक ब्रांच के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM), कथित तौर पर केस दर्ज होने के बाद भी तीसरे आरोपी दानिश शेख के संपर्क में थे; पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले उन्होंने शेख को फोन भी किया था। 13 अप्रैल को, अदालत ने ऑपरेशंस मैनेजर को आगे की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मुख्य आरोपी दानिश शेख और उसके साथ अन्य आरोपी आसिफ अंसारी, शफी शेख, रज़ा मेमन, तौसीफ अत्तार और शाहरुख कुरैशी फिलहाल नासिक रोड जेल में बंद हैं।

टाटा संस के चेयरमैन ने भी एक आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भी एक आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, और इन आरोपों को 'बेहद चिंताजनक और दुखद' बताया है। एक बयान में, चंद्रशेखरन ने कहा कि इस मामले को 'बेहद गंभीरता' से लिया जा रहा है, और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पहले ही शुरू कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि कंपनी चल रही जांच में पूरा सहयोग दे रही है। बयान में कहा गया, 'टाटा ग्रुप अपने कर्मचारियों द्वारा किसी भी तरह के ज़ोर-ज़बरदस्ती या दुर्व्यवहार के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाता है,'और यह भी जोड़ा गया कि तथ्यों का पता लगाने और सभी ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए एक पूरी जांच चल रही है।

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Ravi Vaish
रवि वैश्य author

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों... और देखें

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