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जब मां के लिए भावुक हुए मोदी,हीरा बेन की वो 5 बातें जो बाल नरेंद्र ने उनसे सीखी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 30, 2022, 10:27 AM IST

Narendra Modi Mother Heeraben Death: पीएम नरेंद्र मोदी ने बीते जून में अपने मां के संघर्ष और उनके जीवन के अनछुए पहलुएं को बारे में एक ब्लॉग लिखा था। जिसमें साफ पता चल रहा था कि नरेंद्र मोदी के जीवन में उनकी मां हीरा बेन कितना असर था।

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नरेंद्र मोदी का मां से गरहा नाता

Narendra Modi Mother Heeraben Death: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन का निधन हो गया है। वह उम्र के 100 वें वर्ष के पड़ाव पर पहुंच चुकी थी। इसी साल जून में उन्होंने अपना 99 वां जन्मदिन मनाया था। पीएम मोदी हमेशा से अपनी मां से जीवन में मिले सबक और संघर्ष की कहानियां बयां करते रहे हैं। एक बार वह अमेरिका में जब फेसबुक के मुख्यालय गए थे। तो उस वक्त एक सवाल पर बेहद भावुक हो गए थे। प्रधानमंत्री ने बताया था कि उनकी मां कैसे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरों के घर में बर्तन धुलने का काम करती थीं। पीएम मोदी ने बीते जून में अपने मां के संघर्ष और उनके जीवन के अनछुए पहलुएं को बारे में एक ब्लॉग लिखा था। जिसमें साफ पता चल रहा था कि नरेंद्र मोदी के जीवन में उनकी मां हीरा बेन कितना असर था।

छत से टपकते पानी तक का इस्तेमाल कर लेतीं थी

डेढ़ कमरे के घर की छत को दुरुस्त करने के लिए वो खुद छत की मरम्मत करती थीं। लेकिन जब इतनी कोशिशों के बाद भी छत का टपकना बंद नहीं होता था वो उस जगह पर बर्तन रख देती थीं और उस पानी का इस्तेमाल घर के कार्यों के लिए करती थीं।

सुबह 4 बजे उठना और खुद सारे काम

नरेंद्र मोदी अक्सर यह कहते रहे हैं कि उनकी मां इस उम्र में भी अपना सारा काम खुद करती थीं। हीरा बेन अनाज पीसने से लेकर चावल-दाल छानने तक का सारा काम खुद करती थी। हीरा बेन अपने ससुराल में सबसे बड़ी बहू थीं। ससुराल की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।

सफाई का बेहद ध्यान

पीएम मोदी ने अपनी ब्लॉग में लिखा था कि वह बिस्तर पर धूल का एक कण भी बर्दाश्त नहीं करती थी। हल्की सी सिलवट का मतलब था कि चादर को झाड़ा जाएगा और फिर से बिछाया जाएगा। वह हमेशा इस बात का ध्यान रखती थीं कि घर में साफ-सफाई एक दम दुरूस्त हो। मोदी ने यह भी लिखा था कि मैं जब भी उनसे मिलने गांधीनगर जाता हूं तो वह मुझे अपने हाथों से मिठाई खिलाती हैं।

गांव की डॉक्टर थीं

हीरा बेन को गांव की डॉक्टर भी थी। ऐसे में लोग उन्हें देसी मां कहा करते थे। मोदी लिखते हैं कि भले ही वह कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन वह हमारे गांव की डॉक्टर थी। कड़ी मेहनत और देसी नुस्खों के दम पर ही उन्होंने अपनी उम्र के 100 साल पूरे किए।

जब मोदी से बोलीं-लगता है तुम कुछ अच्छा काम कर रहे हो

पीएम मोदी जब संगठन में काम करते थे, तो उस वक्त हीराबेन केदारनाथ गईं थीं। उस वक्त का किस्सा बताया कि ज्यादा व्यस्त होने की वजह से परिवार के संपर्क में बहुत कम रह पाता था। उस दौरान मेरे बड़े भाई मां को केदारनाथ ले गए। वहां स्थानीय लोगों को ये बात पता चल गई कि नरेंद्र मोदी की मां आ रही हैं। वे सड़कों पर बुजुर्ग महिलाओं से पूछते रहे कि क्या वे नरेंद्र मोदी की मां हैं। जब वह मुझसे मिलीं तो बोलीं 'ऐसा लगता है कि तुम कुछ अच्छा काम कर रहे हैं, क्योंकि लोग तुमको पहचानते हैं।'

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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