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'किसानों के साथ सुरक्षा कवच की तरह खड़ी है मोदी सरकार', जानें कैबिनेट के फैसले पर किसने क्या कहा

Modi Government Plan for Kisan: नये साल में मोदी सरकार ने पहला फैसला किसानों को समर्पित किया। जिसके बाद कई नेताओं ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। वहीं अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के साथ सुरक्षा कवच की तरह खड़ी है और आज वर्ष 2025 के पहले ही दिन अपने इसी संकल्प को पुनः दोहराया है।

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किसानों के लिए मोदी सरकार का बड़ा ऐलान।

New Delhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के साथ सुरक्षा कवच की तरह खड़ी है और उसने 2025 के पहले दिन ही यह संकल्प दोहराया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने डीएपी उर्वरक को 1,350 रुपये प्रति बोरी के भाव पर किसानों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त सब्सिडी को 31 दिसंबर, 2024 से आगे बढ़ाने का बुधवार को फैसला किया। इससे सरकारी खजाने पर 3,850 करोड़ रुपये तक का बोझ पड़ेगा। शाह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद यह टिप्पणी की है।

मोदी सरकार किसानों की सुरक्षा कवच: अमित शाह

शाह ने ‘एक्स’ पर कहा, “ मोदी सरकार किसानों के साथ सुरक्षा कवच की तरह खड़ी है और आज वर्ष 2025 के पहले ही दिन अपने इसी संकल्प को पुनः दोहराया है। डीएपी पर अतिरिक्त सब्सिडी के निर्णय से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों में वृद्धि होने पर भी हमारे किसानों को उचित मूल्य पर ही डीएपी उपलब्ध होगा। इस विशेष पैकेज के लिए मोदी जी का आभार।”

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में करोड़ों किसानों को फसलों के नुकसान से चिंतामुक्त रखने वाली ‘पीएम फसल बीमा योजना’ को निरंतर जारी रखने के लिए 69,515.71 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि साथ ही, 824.77 रुपये करोड़ की लागत से नवाचार और प्रौद्योगिकी कोष (एफआईएटी) को भी मंजूरी दी गई।

नये साल में सरकार का पहला फैसला किसानों को समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘फसल बीमा योजना’ के लिए आवंटन बढ़ाने सहित केंद्रीय मंत्रिमंडल के कुछ अन्य फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि नये साल में सरकार का पहला फैसला किसानों को समर्पित है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक के बाद एक पोस्ट में यह भी कहा कि उनके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2021-22 से लेकर वर्ष 2025-26 तक कुल 69,515.71 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी।

इस निर्णय से 2025-26 तक देश भर के किसानों को नहीं रोके जा सकने योग्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों के जोखिम कवरेज में मदद मिलेगी। इस फैसले का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नए वर्ष का पहला निर्णय हमारे देश के करोड़ों किसान भाई-बहनों को समर्पित है। हमने फसल बीमा के लिए आवंटन बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे जहां अन्नदाताओं की फसलों को और ज्यादा सुरक्षा मिलेगी, वहीं नुकसान की चिंता भी कम होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार किसानों के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमें अपने सभी किसान बहनों और भाइयों पर गर्व है जो हमारे राष्ट्र का पेट भरने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। 2025 का पहला, मंत्रिमंडल का फैसला हमारे किसानों की समृद्धि बढ़ाने के लिए समर्पित है। मुझे खुशी है कि इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।’’ प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा किसानों को सस्ती दर पर डीएपी उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एकमुश्त विशेष पैकेज को 3,850 करोड़ रुपये तक बढ़ाने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे किसानों को सस्ती कीमतों पर डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मंत्रिमंडल के इस फैसले से किसानों को डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की 50 किलो वजन की एक बोरी 1,350 रुपये में मिल सकेगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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