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मोदी सरकार की नीतियां हो रही कारगर, देश में एक्सट्रीम पॉवर्टी का हुआ द इंड; World Poverty Clock के आंकड़ों में सामने आई सच्चाई

The World Poverty Clock Report: भारत में अब एक्सट्रीम पॉवर्टी खत्म हो गई है। The World Poverty Clock की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक्सट्रीम पॉवर्टी 3 फीसदी से कम हो चुकी है। वहीं नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 2013-14 में बहुआयामी गरीबी जो 29.17 प्रतिशत थी वह घटकर 2022-23 में मात्र 11.28 प्रतिशत रह गई है।

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भारत में तेजी से घट रही गरीबी

Photo : iStock

The World Poverty Clock Report: द वर्ल्ड पॉवर्टी क्लॉक की रिपोर्ट भारत के लिए सुकून देने वाली है। इस रिपोर्ट की मानें तो भारत में अब एक्सट्रीम पॉवर्टी 3 प्रतिशत से भी नीचे चली गई है। यानी कि अत्यधिक गरीबी की सीमा से भारत के लोग तेजी से बाहर आए हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की कुल जनसंख्या 143 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें से 3.5 करोड़ के करीब लोग अत्यधिक गरीबी की सीमा में हैं जो कुल जनसंख्या का मात्र दो प्रतिशत के करीब है। इससे पहले नीति आयोग के द्वारा जारी आंकड़ों में भी बताया गया था कि 9 साल में 24.82 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा लोग अत्यधिक गरीबी की रेखा से बाहर निकले हैं।

देश में लगातार हो रही गरीबों की संख्या कम

नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी दर्ज था कि 2013-14 में बहुआयामी गरीबी जो 29.17 प्रतिशत थी वह घटकर 2022-23 में मात्र 11.28 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट में यह दर्शाया गया था कि तेज रफ्तार से गरीब राज्यों में गरीबी घटी है और इसकी वजह से आर्थिक असमानता में कमी आई है। अब ऐसे में द वर्ल्ड पॉवर्टी क्लॉक की रिपोर्ट की मानें तो भारत जैसे विशाल देश जहां कई तरह की विविधता है, इसके बावजूद भी गरीबी रेखा में आई कमी इस बात को दिखा रही है कि देश में लगातार गरीबों की संख्या कम हुई है।

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विश्व बैंक की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में यह दर्शाया गया था कि 2011 से 2019 के बीच गरीबों की संख्या में 12.3 प्रतिशत की कमी आई थी। ऐसे में द वर्ल्ड पॉवर्टी क्लॉक की रिपोर्ट की मानें तो भारत में गरीबों की संख्या आज भी ग्रामीण क्षेत्र में सर्वाधिक है। इस रिपोर्ट की मानें तो भारत के कुल अत्यधिक गरीबों की संख्या का 94 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में ही निवास करता है। जबकि, शहरी क्षेत्र में मात्र 6 प्रतिशत अत्यधिक गरीब ही रहते हैं। वहीं, इसके साथ हीं विश्व बैंक की तरफ से पूर्व में जारी एक पॉलिसी रिसर्च वर्किंग पेपर के आंकड़ों की मानें तो कांग्रेस राज में भारत में रिकॉर्ड 22.5 लोग अत्यंत गरीबी की श्रेणी में थे।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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