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'गाजा पर मोदी सरकार मूकदर्शक…' खरगे बोले- PM को उठानी चाहिए भारत की आवाज

Gaza: मल्लिकार्जुन खरगे गाजा संकट पर कुछ न बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की और उनकी चुप्पी को बेहद निराशाजनक बताया। खरगे ने कहा कि भारत उन पहले देशों में से एक था जिसने फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) और फिलिस्तीन राज्य दोनों को मान्यता दी थी। खरगे ने लिखा कि भारत हमेशा से दो-राज्य समाधान और इजराइल और फिलिस्तीन के बीच न्यायपूर्ण शांति का समर्थक रहा है।

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कांग्रेस ने पीएम मोदी पर साधा निशाना (ANI)

Photo : ANI

Congress: कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को गाजा संकट पर कुछ न बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की और उनकी चुप्पी को बेहद निराशाजनक बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के विचारों को दोहराया जिन्होंने सोमवार को दैनिक जागरण में एक लेख में लिखा था कि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार गाजा संकट में मूकदर्शक बनी हुई है। एक्स पर एक पोस्ट में खड़गे ने कहा कि यह नैतिक कायरता की पराकाष्ठा है। समय आ गया है कि वह भारत द्वारा प्रतिनिधित्व की गई विरासत की ओर से स्पष्ट और साहसिक शब्दों में एक मजबूत आवाज उठाएं। आज, वैश्विक दक्षिण एक बार फिर इस मुद्दे पर भारत के नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहा है, जो पूरी मानवता की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर देता है।

गाजा के लोगों पर इजराइल कर रहा अत्याचार: खरगे

खरगे ने कहा कि भारत उन पहले देशों में से एक था जिसने फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) और फिलिस्तीन राज्य दोनों को मान्यता दी थी। खरगे ने लिखा कि भारत हमेशा से दो-राज्य समाधान और इजराइल और फिलिस्तीन के बीच न्यायपूर्ण शांति का समर्थक रहा है। 1974 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) को फिलिस्तीनी लोगों के एकमात्र और वैध प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश बना। 1988 में भारत फिलिस्तीन को आधिकारिक रूप से मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। गाजा के लोगों पर इजराइल द्वारा जारी अत्याचारों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की शर्मनाक चुप्पी बेहद निराशाजनक है।

सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि गाजा संघर्ष ने वैश्विक व्यवस्था की सबसे गंभीर कमजोरियों में से एक को उजागर कर दिया है। उन्होंने स्थायी और बिना शर्त युद्धविराम के आह्वान वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने की आलोचना करते हुए कहा कि इन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। भारत को वैश्विक न्याय का प्रतीक बताते हुए, उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों को प्रेरित करते हुए, साम्राज्यवाद के खिलाफ आवाज उठाते हुए और विशेष रूप से द्वि-राज्य समाधान का समर्थक बताते हुए कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से 17000 बच्चों सहित 55000 से अधिक फिलिस्तीनियों की हत्या के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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