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मिजोरम-म्यांमार सीमा पर ED का बड़ा एक्शन, अवैध बर्मी सुपारी तस्करी नेटवर्क के 9 ठिकानों पर छापेमारी

ईडी (ED) ने मिजोरम-म्यांमार सीमा पर बड़ा एक्शन करते हुए 'बर्मी सुपारी' (सूखी सुपारी) की तस्करी के एक बड़े हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

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मिजोरम-म्यांमार सीमा पर ED का बड़ा एक्शन (फाइल फोटो- PTI)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय तस्करों और हवाला ऑपरेटरों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को मिजोरम के सीमावर्ती जिले चम्फाई में एक साथ कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। ED की इस बड़ी कार्रवाई का मुख्य निशाना म्यांमार से होने वाली अवैध 'बर्मी सुपारी' (सूखी सुपारी) की तस्करी से जुड़ा एक बेहद संगठित और रसूखदार नेटवर्क है।

9 ठिकानों पर एक साथ रेड

ED की अलग-अलग टीमों ने चम्फाई जिले के 9 विभिन्न और रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी उन स्थानीय बड़े कारोबारियों और उनके कथित मददगारों के आवासों और व्यापारिक परिसरों पर की जा रही है, जो इस पूरे सिंडिकेट को बैकएंड से ऑपरेट कर रहे थे। इस औचक कार्रवाई के बाद से ही सीमावर्ती इलाकों के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

तियू नदी से तस्करी और फर्जी बिलों का 'गंदा खेल'

ED की प्रारंभिक जांच में इस सिंडिकेट के काम करने के तरीके को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। म्यांमार से अवैध रूप से लाई जाने वाली सुपारी की बड़ी-बड़ी खेपों को दोनों देशों की सीमा पर बहने वाली तियू नदी के रास्ते अवैध तरीके से भारत में दाखिल कराया जाता था। भारत की सीमा में एंट्री के बाद इस खेप को स्थानीय गोदामों में छिपा दिया जाता था। इसके बाद असली खेल शुरू होता था। तस्करों द्वारा फर्जी ई-वे बिल और जाली कागजात तैयार किए जाते थे, ताकि इस अवैध विदेशी सुपारी को स्थानीय स्तर पर खरीदी गई वैध सुपारी दिखाया जा सके। इसके बाद इसे देश के अन्य बड़े बाजारों और राज्यों में सप्लाई कर दिया जाता था।

ट्राइबल कार्ड और पुराने कागजातों का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के मास्टरमाइंड्स ने खुद को कानून की नजरों से बचाने के लिए स्थानीय जनजातीय (ट्राइबल) पहचान का गलत इस्तेमाल किया। वे खुद को सीमा पार व्यापार से जुड़ा एक वैध और छोटा कारोबारी साबित करने की कोशिश करते थे। हद तो तब हो गई जब पूर्व में कस्टम विभाग (सीमा शुल्क विभाग) ने इनकी सुपारी की खेप को जब्त किया था, तब आरोपियों ने उस माल को छुड़ाने के लिए बहुत पुराने और पूरी तरह से असंबंधित आयात दस्तावेजों को असली बताकर पेश कर दिया था।

सैकड़ों करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का शक

प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि इस संगठित और अवैध बर्मी सुपारी के काले कारोबार के जरिए अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति और अवैध फंड पैदा किया गया है। तस्करों ने इस काली कमाई को विभिन्न संदिग्ध माध्यमों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाकर वैध (सफेद) दिखाने की कोशिश की है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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