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भारत के इस राज्य में है एशिया का ये सबसे साफ-सुथरा गांव, लिविंग रूट ब्रिज देखने विदेशों से आते है लोग

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 20, 2023, 12:58 PM IST

इसकी बेमिसाल सुंदरता यहां आने वाले पर्यटकों का दिल जीत लेती है। यहां के लोग इसे 'भगवान का अपना बगीचा' भी कहते हैं।

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लिविंग रूट ब्रिज (Credit: MoEFCC Twitter Handle)

The Cleanest Village In Asia: कल्पना कीजिए कि आप किसी ऐसी जगह पर हैं जो बादलों से घिरी हुई है। हर तरफ हरियाली है और वह सबसे साफ-सुथरी जगह है। आज के दौर में ये महज एक कल्पना ही लग सकती है। लेकिन ये हकीकत है और आपको जानकर हैरत होगी कि ये गांव भारत में ही है।

महज 82 घरों वाला ये गांव मावलिननोंग (Mawlynnong) भारत का सबसे स्वच्छ गांव है। ये गांव भारत ही नहीं एशिया का भी सबसे साफ-सुथरा गांव माना जाता है। इसकी बेमिसाल सुंदरता यहां आने वाले पर्यटकों का दिल जीत लेती है। यहां के लोग इसे 'भगवान का अपना बगीचा' भी कहते हैं। एक बार जो यहां आ जाए, इसके आकर्षण से बच नहीं सकता।

रोजाना उमड़ती है भीड़, फिर भी सबसे स्वच्छ

इस छोटे से गांव में पर्यटकों की भीड़ रोजाना उमड़ती है इसके बावजूद ये बेहद साफ-सुथरा रहता है। वजह है यहां के लोगों की साफ-सफाई के बारे में जागरुकता। इस गांव में रहने वाले लगभग सभी स्थानीय खासी जनजाति के हैं।

लोग गांव में खेती के लिए कचरे को खाद के रूप में उपयोग करते हैं, जिससे वे इसे कचरा मुक्त गांव बनाए रखते हैं। गांव के निवासी हर जगह को साफ रखने की जिम्मेदारी उठाते हैं और पत्तियां उठाना और बांस के कचरे के डिब्बे में कचरा फेंकना जैसे नजारे यहां आम दृश्य है। गांव में शत प्रतिशत साक्षरता दर भी है और यहां प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जंगल का संरक्षण यहां एक मिशन है, जिससे यह देश के पर्यावरण के प्रति जागरूक केंद्रों में से एक बन गया है।

लिविंग रूट ब्रिज खास आकर्षण

गांव में घूमकर कोई भी यह समझ सकता है कि यहा सफाई कोई दिखावा नहीं है। यहां रहने वाले खासी जाति के लोगों के घरों में भी इस प्रथा का पालन होता है। यह गांव भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित है और इसकी सुंदरता की कहीं कोई मिसाल ही नहीं मिलती है। यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है पास के ही रिवाई को जोड़ने वाला लिविंग रूट ब्रिज। ये एक तरह से पेड़ की जड़ों और मिट्टी से बना प्राकृतिक पुल है जो दो गांवों को जोड़ता है। कुदरत के इस बेमिसाल करिश्मे को देखने के लिए पर्यटक बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

लिविंग रूट ब्रिज विशेष रूप से एक प्राकृतिक आश्चर्य है जिसे यहां पहुंचकर ही महसूस किया जा सकता है। रबड़ के दो पेड़ों की जड़ें नीचे की ओर बहने वाली नदी के ऊपर एक पुल बनाते हुए आपस में जुड़ी हुई हैं। कार्बन डेटिंग से पता चलता है कि पुल पिछले 1100 सालों से बन रहा है। यूरोप से लोग अक्सर यहां समय बिताने आते हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी से शांति चाहने वालों के लिए ये पसंदीदा प्राकृतिक पड़ाव बना हुआ है।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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