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ईरान युद्ध से निकले कई सबक, दो मोर्चों पर भारत को भी करने होंगे ये जरूरी काम

दुनिया में बस एक ही चीज चलेगी वह है ताकत यानी जिसके पास जितनी ताकत होगी, वह उतना ही दुनिया पर राज करेगा या दुनिया उसी की बात मानेगी, उसी की सुनेगी। इस युद्ध से संदेश बिल्कुल साफ और स्पष्ट हो गया है। भारत को इस युद्ध से सबक लेते हुए अपनी रक्षा तैयारी और तेज और पुख्ता करनी होगी।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।

Photo : AP

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद से एक बात तो साफ हो गई है कि संयुक्त राष्ट्र की अब कोई अहमियत नहीं रह गई है। वह सफेद हाथी है। उसकी कोई नहीं सुनता। अमेरिका तो बिल्कुल भी नहीं। वेनेजुएला के बाद अब ईरान पर हमले ने ट्रंप के मुंह में खून लगा दिया है। वह यहीं नहीं रुकेंगे। उनका अगला निशाना क्यूबा बन सकता है। वह कह भी चुके हैं कि क्यूबा में सत्ता का फ्रेंडली हंस्तारण होगा। फ्रेंडली होने में दिक्कत हुई तो वहां भी सैन्य ऑपरेशन कर सकते हैं। कहने का मतलब है कि कोई भी अमेरिका या ट्रंप को रोक नहीं पा रहा है। यूएन जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं असहाय हैं। वे कुछ कर पा नहीं रही है। ट्रंप के दौर में कूटनीत और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह गया है।

रक्षा तैयारी और तेज एवं पुख्ता करनी होगी

दुनिया में बस एक ही चीज चलेगी वह है ताकत यानी जिसके पास जितनी ताकत होगी, वह उतना ही दुनिया पर राज करेगा या दुनिया उसी की बात मानेगी, उसी की सुनेगी। इस युद्ध से संदेश बिल्कुल साफ और स्पष्ट हो गया है। भारत को इस युद्ध से सबक लेते हुए अपनी रक्षा तैयारी और तेज एवं पुख्ता करनी होगी। अभी की अगर बात करें तो भारत का रक्षा बजट उसकी जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद के करीब दो प्रतिशत है। इस कम से कम बढ़ाकर 4 प्रतिशत या दोगुना करना होगा। जब आपके पास ताकत होगी तो दुश्मन भी डरेगा। दुश्मन में खौफ, भय डर ऐसे नहीं आता। उसको पता रहना चाहिए कि उसकी एक गलती बहुत भारी पड़ जाएगी। हम अगर पत्थर फेकेंगे तो उधर से पहाड़ गिरेगा..जब इस तरह की ताकत आप रखेंगे तो दुश्मन में दहशत और डर एक डेटेरेंस के रूप में काम करेगा।

5वीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन जरूरी

इन दिनों युद्ध रूस यूक्रेन की तरह लंबे समय तक चल सकते हैं।या ऑपरेशन सिंदूर की तरह चार दिनों में खत्म हो सकते हैं।लॉन्ग और शॉर्ट दोनों तरह के युद्ध लड़ने की काबिलियत रखनी होगी।ईरान-अमेरिका, इजरायल युद्ध से यह भी साफ दिखता है कि जो जितनी दूर से दुश्मन को निशाना बना पाएगा, वह एज पर रहेगा। हजारों किलोमीटर दूर से सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें और ड्रोन आपके हथियारों के जखीरे में होनी चाहिए।स्टील्थ फाइटर प्लेन यानी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान जितना जल्दी हो सके।भारत को अपनी वायु सेना में शामिल करना चाहिए।भारत को राफेल से आगे जाकर कुछ स्क्वाड्रन पांचवीं पीढ़ी के भी होने चाहिए।चाहे वह रूस का सू-57 क्यों न हो।ऐसा इसलिए क्योंकि चीन के पास वर्षों पहले से पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन हैं।चीन इससे भी आगे बढ़ चुका है।वह अपने छठवें पीढ़ी के फाइटर प्लेन का प्रोटोटाइप दुनिया को दिखा चुका है।अमेरिका भी छठवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन पर काम कर रहा है।

महंगाई बढ़नी तय है

दोस्तो, ईरान के इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर होना लाजिमी है।.ईरान में रिजीम चेंज होगा या नहीं। इसके बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।हालांकि सुप्रीम लीडर खामनेई और आईआरसीजी के शीर्ष अपसरों एवं कमांडरों के मारे जाने के बाद ईरान का शीर्ष नेतृत्व एक तरह से खत्म हो चुका है।ईरान अभी सरेंडर करने के मूड में नहीं है।वह लड़ रहा है।बहरीन, सऊदी, ओमान सहित कई देशों में उसने हमले किए हैं।.इससे युद्ध की आग पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले रही है।इससे तेल के दाम अचानक बढ़ेंगे।दुनिया भर की अर्थव्यस्थाएं हिलेंगी और महंगाई बढ़नी तय है।

सीरिया, लीबिया जैसे हो सकते हैं हालात

मध्य पूर्व में लाखों की संख्या में भारतीय रहते हैं।युद्ध लंबा खिंचा तो वे बुरी तरह प्रभावित होंगे।35 लाख के करीब भारतीय तो केवल यूएई में रहते हैं।इसके बाद सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन और मध्य पूर्व के देशों में भारतीयों की अच्छी-खासी संख्या में काम करते हैं।अपनी सुरक्षा के लिए ये सभी भारत लौटना चाहेंगे।इनकी सुरक्षित घर वापसी भी भारत सरकार की जिम्मेदारी है..ईरान में यदि रेजीम चेंज भी हो जाता है तो यह जरूरी नहीं कि वहां कोई स्थिर सरकार उभरकर आएगी। ईरान अनिश्चितता, अराजकता और गृहयुद्ध जैसे हालात एवं संकट से घिर सकता है।क्योंकि सीरिया, लेबनान जैसे देशों में यही हुआ है।.दशकों बाद भी इन देशों में आज तक कोई लोकतंत्र पनप नहीं पाया है।कहने का मतलब है कि ईरान से सबक लेते हुए भारत को अपनी तैयारी पर तेजी से काम करना होगा।.इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि भारत सैन्य और अर्थव्यवस्था दोनों मोर्चों पर इतना ताकतवर बन जाए कि कोई भी इसकी तरफ आंख उठाने के बारे में जुर्रत नहीं कर पाए।.

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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