देश

Mann ki Baat: मिलिए 'मन की बात' के Heroes से, जिनको PM Modi ने फिर से लगाया फोन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 30, 2023, 12:46 PM IST

Mann ki Baat: मन की बात के 100वें एपिसोड में पीएम मोदी ने असल जिंदगी के हीरोज से बात की। पीएम मोदी ने कहा, मन की बात में जिन लोगों का हम जिक्र करते हैं, वे सभी हमारे हीरोज हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम को जीवंत बनाया है।

Image

मन की बात का 100वां एपिसोड

Photo : Twitter

Mann ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार(आज) को मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित किया। यह पीएम मोदी के रेडिया कार्यक्रम का 100वां एपिसोड था। इस दौरान पीएम मोदी ने मन की बात के 100 एपिसोड पूरे होने की यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, यह कार्यक्रम मेरे लिए एक खास पूजा, आस्था और व्रत बन चुका है। मन की बात मेरे मन की आध्यात्मिक यात्रा बन चुकी है।

पीएम मोदी ने कहा, मन की बात में जिन लोगों का हम जिक्र करते हैं, वे सभी हमारे हीरोज हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम को जीवंत बनाया है। आज हम सब 100वें एपिसोड के पड़ाव पर पहुंचे हैं, तो मेरी ये भी इच्छा है कि हम एक बार फिर इन सारे हीरोज के पास जाकर उनकी यात्रा के बारे में जानें। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने किन-किन लोगों से फोन पर की बात...

हरियाणा के सुनील जगलान को लगाया फोन

पीएम मोदी ने इस दौरान हरियाणा के सुनील जगलान का जिक्र किया। उन्होंने बताया, मैंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का अभियान हरियाणा से ही शुरू किया था और इसी बीच जब सुनील जी के सेल्फी विद डॉटर अभियान पर मेरी नजर पड़ी तो मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बताया, मैंने उनसे सीखा और इसे मन की बात कार्यक्रम में शामिल ककिया। देखते ही देखते सेल्फी विद डॉटर ग्लोबल अभियान में शामिल हो गया। इस दौरान पीएम मोदी ने सुनील जगलान से फोन पर बात भी की। उन्होंने कहा, जीवन में बेटी का स्थान कितना बड़ा हेाता है, इस अभियान से यह प्रकट हो गया। ऐसे ही प्रसासों का परिणाम है कि हरियाणा में जेंडर रेशियो में सुधार आया है।

जम्मू-कश्मीर के मंजूर अहमद से की बात

पीएम मोदी ने कहा, मन की बात में जम्मू-कश्मीर के मंजूर अहमद का जिक्र हुआ था। इसमें कश्मीर की पेन्सिल स्लेट्स के बारे में बताया गया था। इस दौरान पीएम मोदी ने मंजूर अहमद से बात भी की। उन्होंने बताया कि जब से मन की बात कार्यक्रम में मेरी बात का जिक्र हुआ, मेरा काम बढ़ गया है। दूसरों को भी रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया, अभी मेरे पास 200 से ज्यादा लोग हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वोकल फॉर लोकल की ताकत कितनी जबरदस्त है, आपने धरती पर ही उतार दिया। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के दउर गांव की महिलाओं की भी चर्चा की। उन्होंने बताया, ये महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए गांव के चौराहों, सड़कों और मंदिरों में सफाई अभियान चलाती हैं। पीएम ने तमिलनाडु की आदिवासी महिलाओं के बारे में भी बात की, जिन्होंने हजारों टेराकोटा कप्स निर्यात किए।

मणिपुर की विजयशांति का किया जिक्र

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर की विजयशांति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि विजयशांति कमल के रेशों से कपड़े बनाती हैं। मन की बात में उनके इस अनोखे इको फ्रेंडली आइडिया की बात हुई तो उनका काम और लोकप्रिय हो गया। उन्होंने विजयशांति से फोन पर बात भी की। पीएम ने कहा, मन की बात के जरिए कितने ही जन आंदोलन ने जन्म भी लिया है और गति भी पकड़ी है। इस दौरान उन्होंने खिलौना उद्योग का भी जिक्र किया।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article