Manipur violence: मणिपुर में मेइती (Meitei) समुदाय को एससी श्रेणी में शामिल कराने की मांग के विरोध में हुई रैली के बाद हिंसा भड़क गई। भीड़ ने बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे (Vungzagin Valte) पर गुरुवार को इंफाल में हमला किया। जब वह मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से मुलाकात कर प्रदेश के सचिवालय से लौट रहे थे। राज्य भर में आदिवासियों और बहुसंख्यक मेइती (Meitei) समुदाय के बीच हिंसा भड़कने के बाद मणिपुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी।
इंडिया टूडे के मुताबिक फिरजावल जिले के थानलॉन से तीन बार के विधायक वाल्टे उस वक्त इंफाल में अपने सरकारी आवास जा रहे थे जब यह हमला हुआ। गुस्साई भीड़ ने विधायक और उनके ड्राइवर पर हमला कर दिया जबकि उनके पीएसओ भागने में सफल रहे। विधायक की हालत गंभीर है और इंफाल के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में उनका इलाज चल रहा है। वाल्टे कुकी समुदाय से हैं। वह पिछली बीजेपी सरकार में मणिपुर के जनजातीय मामलों और पहाड़ी मंत्री थे।
Manipur violence: जानिए क्या है पूरा मामला
ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर ATSUM) ने बुधवार को राज्य के 10 पहाड़ी जिलों में गैर-आदिवासी Meiteis की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की स्टेटस के लिए मांग के विरोध में एक 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया था जो मणिपुर की आबादी का 53 प्रतिशत हिस्सा है। चूड़ाचंदपुर जिले के तोरबुंग क्षेत्र में मार्च के दौरान एक सशस्त्र भीड़ ने कथित तौर पर Meitei समुदाय के लोगों पर हमला किया। जिसके कारण घाटी के जिलों में जवाबी हमले हुए, जिसने पूरे राज्य में हिंसा फैल गई।
टोरबंग में तीन घंटे से अधिक समय तक चली आगजनी में कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई। लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि संपत्ति के नुकसान के अलावा कीमती जान चली गई है, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम ने कहा कि हिंसा समाज में 'गलतफहमी' का नतीजा है।
पूरे मणिपुर में फैले व्यापक दंगों को रोकने के लिए सेना और असम राइफल्स तैनात किए गए हैं। मणिपुर के राज्यपाल ने गुरुवार को राज्य में बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए गंभीर मामलों में देखते ही गोली मारने के आदेश को अपनी मंजूरी दे दी। मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के बाद, मणिपुर में अब हिंसा और अफवाह फैलाने के लिए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है।
