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एक थप्पड़ ने रोका आतंकी हमला: महाराष्ट्र के मंदिर में हुआ कुछ ऐसा, देख नहीं रुकेगी हंसी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 9, 2023, 09:45 AM IST

Police Mock Drill: स्वामी नारायण मंदिर में उस समय चीख पुकार मच गई, जब कुछ आतंकवादी हाथ में राइफल लेकर घुस आए। उन्होंने श्रद्धालुओं को बंधक बनाना शुरू कर दिया जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया। इस पूरी घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

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Man slaps armed Terrorist

Photo : Twitter

Police Mock Drill: आप परिवार के साथ मंदिर में पूजा-पाठ करने गए हों। अचानक से आपको पता चले कि कुछ आतंकी मंदिर में घुस आए हैं। हथियार बंद आतंकी वहां मौजूद लोगों को बंधक बना लें, तो किसी की भी जान हलक में आना लाजमी है। ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र के स्वामी नारायण मंदिर में भी हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

स्वामी नारायण मंदिर में उस समय चीख पुकार मच गई, जब कुछ आतंकवादी हाथ में राइफल लेकर घुस आए। उन्होंने श्रद्धालुओं को बंधक बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया। यह देख एक बच्चा भी रोने लगा, जिसके बाद बच्चे का पिता इतना नाराज हुआ कि उसने हथियार बंद आतंकी को थप्पड़ जड़ दिया। इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

मुंह पर कपड़ा बांधे और हाथों में लिए थे राइफल

यह घटना छह अगस्त की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक स्वामी नारायण मंदिर की कैंटीन में मुंह पर कपड़ा बांधे और हाथों में राइफल लेकर कुछ आतंकवादी घुस आए। जिस समय यह सब हुआ, मंदिर की कैंटीन में बड़ी संख्या में परिवारीजन बच्चों और बुजुर्गों के साथ मौजूद थे।

पुलिस कर रही थी मॉक ड्रिल

बता दें, मंदिर में कोई असली आतंकवादी नहीं बल्कि डमी आतंकी थी। यह मॉक ड्रिल पुलिस की ओर से आयोजित की गई थी, जिसके तहत पुलिस इस तरह के आतंकी हमले से बचने के लिए तैयारियों को परखा जा सके। हालांकि, एक व्यक्ति द्वारा थप्पड़ जड़ने के बाद काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। जब व्यक्ति को पता चला कि यह पुलिस की मॉकड्रिल है, जब जाकर उसका गुस्सा शांत हुआ।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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