चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर जारी बहस के बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाए।
महुआ मोइत्रा ने अपनी पोस्ट में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी-शाह (पीएम मोदी-अमित शाह) को यह समझने में कई सप्ताह लग गए कि उन्हें धर्मेंद्र प्रधान को जाने देना होगा। इसके बाद उन्होंने लिखा कि अब देखना होगा कि उन्हें यह समझने में कितना समय लगता है कि ज्ञानेश कुमार को भी जाना होगा।
महुआ मोइत्रा ने आगे सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार कहां हैं और वह ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से माफी मांगने तथा हलफनामे की मांग को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक करदाता के तौर पर जनता ज्ञानेश कुमार की सैलरी और सुविधाओं का खर्च उठा रही है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर यह विवाद चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट के बाद तेज हुआ है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनके इस्तीफे की मांग की है। वहीं, एक संगठन ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
चुनाव आयोग ने क्या दी है सफाई?
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों के बीच कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और अलग-अलग राय या टिप्पणियां उसकी आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 से भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
