TMC Spilt: तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर नियंत्रण को लेकर जारी लड़ाई मंगलवार को और तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे ने दावा किया कि उसने दो दिन पहले ही नयी राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर लिया था और बागी गुट द्वारा ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर समानांतर नेतृत्व की घोषणा किए जाने से कुछ घंटे पहले ही इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को भेज दी थी। यह जानकारी तब सामने आई जब विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में बागी नेता पार्टी संगठन पर अपना दावा मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर जाने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही, 1998 में ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई पार्टी पर नियंत्रण की लड़ाई में एक नया मोर्चा खुल गया है।
ममता बनर्जी खेमे का दावा
ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा रखने वाले नेताओं के अनुसार, पार्टी की नेतृत्व संरचना और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को शनिवार को अंतिम रूप दिया गया था और इसकी सूची सोमवार दोपहर निर्वाचन आयोग को सौंपी गई। यह कदम विपक्ष के नेता बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट गुट के कोलकाता में विशेष अधिवेशन आयोजित करने से पहले उठाया गया। ममता खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई-भाषा से कहा, जब बागी गुट अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन की तैयारी कर रहा था, तब तक ममता बनर्जी पार्टी अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देकर उसकी सूची निर्वाचन आयोग को भेज चुकी थीं।
ममता बनर्जी पार्टी अध्यक्ष, सुब्रत बक्शी को उपाध्यक्ष
सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग को भेजी गई सूची में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष, सुब्रत बक्शी को उपाध्यक्ष, अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव तथा शुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष बताया गया है। ममता खेमे के सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग को भेजी गई नयी समिति की संरचना पहले की संगठनात्मक व्यवस्था से अलग है और इसमें असंतुष्ट गुट से जुड़े कई नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। नई समिति से अरूप विश्वास और फिरहाद हकीम का नाम हटाया गया है, वहीं राज्यसभा सदस्य नदीमुल हक को इसमें रखा गया है।
बागी गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले बागी गुट ने न्यू टाउन के एक होटल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का एक विशेष सत्र आयोजित करने का दावा किया। जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने, वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुनने और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन की घोषणा की थी। इससे पार्टी के भीतर संगठनात्मक विभाजन और गहरा हो गया है। कई जिलों के नेताओं ने बैठक में भाग लिया, जिसमें बागी खेमे द्वारा घोषित समानांतर सांगठनिक ढांचे को औपचारिक स्वीकृति दी गई।
मंगलवार को बागी खेमे ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया। इसके नेता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का दौरा करके अपने संगठन को कानूनसम्मत तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता दिए जाने का अनुरोध कर सकते हैं। ममता बनर्जी के खेमे द्वारा आयोग को पदाधिकारियों की संशोधित सूची सौंपे जाने के बाद, असंतुष्टों की ओर से निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के सामने अपना दावा पेश करने की यह पहली औपचारिक कोशिश होगी।
कई विधायकों को ममता गुट का कारण बताओ नोटिस जारी
एक अन्य कदम के तहत पार्टी की अनुशासन समिति ने फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मीन सहित कई वरिष्ठ नेताओं को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वरिष्ठ टीएमसी नेता और विधायक कुणाल घोष ने बागी खेमे की गतिविधियों को खारिज करते हुए कहा, यह एक हास्यास्पद नाटक है। जिस व्यक्ति को तृणमूल से निष्कासित किया जा चुका है, वह विशेष अधिवेशन आयोजित कर रहा है। मामला अदालत में है और हमें न्याय मिलने का भरोसा है। हम ऐसे हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते। टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी है, बाकी सब तमाशा है।
ऋताब्रता बनर्जी ने असंतुष्ट खेमे की वैधता का बचाव किया
हालांकि ऋताब्रता बनर्जी ने असंतुष्ट खेमे की वैधता का बचाव किया। उन्होंने कहा, कुणाल घोष निर्वाचन आयोग नहीं हैं। हमने जो कुछ भी किया है पूरी तरह कानून के अनुसार है। इससे पहले पार्टी के कोष को लेकर भी गतिरोध सामने आ चुका है। अब मुख्य सवाल यह है कि पार्टी की किस संगठनात्मक संरचना को वैध माना जाएगा। बागी गुट ने पुलिस से संपर्क करके तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों में लेन-देन रोकने की मांग की थी, जिससे पार्टी नेतृत्व को कई मोर्चों पर चुनौती देने के उनके इरादे का संकेत मिला।
कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, यह विवाद निर्वाचन आयोग के समक्ष उठ सकता है और अंततः अदालत तक भी पहुंच सकता है।
दोनों गुटों के परस्पर विरोधी दावों ने टीएमसी के भीतर जारी संकट को नया आयाम दे दिया है। अब दोनों पक्ष पार्टी के संगठनात्मक और विधायी ढांचे पर दावा कर रहे हैं, जिससे 1998 में ममता बनर्जी द्वारा स्थापित इस पार्टी पर नियंत्रण को लेकर लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की संभावना बन गई है।
