'AI से 2002 की वोटर लिस्ट को किया गया डिजिटल, जिससे बड़े पैमाने पर हुईं त्रुटियां'; CM ममता ने CEC को लिखा पांचवां पत्र
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 12, 2026, 04:10 PM IST
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फिर से पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि 2002 की मतदाता सूचियों में एआई-आधारित डिजिटलीकरण त्रुटियों के कारण विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वास्तविक मतदाताओं को व्यापक परेशानी हो रही है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ राज्य सरकार की लड़ाई बढ़ती ही जा रही है। अब एक बार फिर सूबे की मुखिया ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि एआई का इस्तेमाल करके 2002 की मतदाता सूची को डिजिटल किया गया। जिसमें बड़े और व्यापक पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं हैं और इसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है।
ममता का ये पांचवां पत्र
साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अपने द्वारा ही किए गए 20 सालों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा गया यह पांचवां पत्र है। इससे पहले वे चार बार पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की बात उठा चुकी हैं।
एसआईआर को बना दिया गया यांत्रिक
एसआईआर की शुरुआत के बाद से यह उनका पांचवां पत्र है। ममता बनर्जी ने कहा कि एआई टूल्स के जरिए 2002 की मतदाता सूची को डिजिटाइज करने के दौरान मतदाता विवरण में गंभीर त्रुटियां हुईं, जिसके चलते बड़े पैमाने पर डेटा में असंगतियां पैदा हुईं। इतना ही नहीं कई वास्तविक मतदाताओं को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (तार्किक त्रुटि) वाले मतदाता के रूप में गलत तरीके से चिन्हित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पिछले दो दशकों से अपनाई जा रही अपनी वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के विवरण पहले अर्ध-न्यायिक सुनवाई के बाद ठीक किए जा चुके थे, उनसे अब दोबारा अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने लिखा कि दो दशकों से चली आ रही अपनी ही प्रक्रियाओं और तंत्रों को नकारने वाला यह रवैया मनमाना, अतार्किक और भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ है।
नहीं दी जा रही कोई रसीद
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान जमा किए जा रहे दस्तावेजों के लिए कोई समुचित रसीद या पावती नहीं दी जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण हो जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर की सुनवाई प्रक्रिया अब मुख्य रूप से तकनीकी डेटा पर आधारित हो गई है तथा इसमें विवेक, संवेदनशीलता और मानवीय स्पर्श का पूरी तरह अभाव है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हमारे लोकतंत्र और संवैधानिक ढांचे की बुनियाद को कमजोर करती है।
पहले भी लिख चुकीं है पत्र
ममता बनर्जी इससे पहले चार बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया की विसंगतियों को बता चुकी हैं। अभी बीते शनिवार को ही उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया रिकॉर्ड सही करने के बजाय मतदाताओं के नाम हटाने की कवायद बना दी गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य न तो सुधार करना है और न ही नाम जोड़ना...बल्कि केवल नाम काटना है। बनर्जी ने दावा किया कि वर्तनी या उम्र संबंधी मामूली त्रुटियों के कारण आम लोगों को जबरन सुनवाई, उत्पीड़न और वेतन हानि का सामना करना पड़ रहा है।मुख्यमंत्री ने शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं की दिक्कतों को भी रेखांकित किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है। उन्होंने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में ‘‘तार्किक विसंगतियों’’ को चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने, पश्चिम बंगाल में एक अलग पोर्टल के इस्तेमाल और अन्य प्रणालियों में बदलाव के कारण अधिकारियों के बीच भ्रम पैदा होने को लेकर भी चिंता जताई।
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