Rahul Gandhi Petition: राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले रजिस्ट्री ने 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। 12 अक्टूबर 2026 को दर्ज इन आपत्तियों में याचिका में निजी पक्षों को प्रतिवादी बनाने के कारण से लेकर वकालतनामे, पहचान पत्र, कोर्ट फीस और दस्तावेजों की स्पष्टता तक से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। याचिका में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े मुद्दों को चुनौती दी गई है।
9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं मिले
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के मुताबिक, याचिकाकर्ता नंबर 3 से 11 तक के वकालतनामे नहीं मिले हैं। इसके अलावा, याचिकाकर्ता नंबर 2 यानी मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी जमा करने को कहा गया है।
निजी पक्षों को प्रतिवादी बनाने पर स्पष्टीकरण मांगा
रजिस्ट्री ने पूछा है कि रिट याचिका में निजी पक्षों को प्रतिवादी क्यों बनाया गया है। साथ ही, याचिका के पेज नंबर 9 पर प्रतिवादियों का विवरण गलत बताया गया है, जिसे ठीक करने को कहा गया है। याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। हालांकि, उपलब्ध रजिस्ट्री रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं है कि आपत्ति विशेष रूप से इन्हीं दोनों नामों को लेकर है।”
पहले दायर याचिका और समानता संबंधी पैराग्राफ पर भी आपत्ति
रजिस्ट्री ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत यह जानकारी देने से जुड़ी आपत्ति दर्ज की है कि क्या याचिकाकर्ता ने चुनौती दिए गए आदेश या फैसले के खिलाफ पहले भी कोई याचिका दायर की है और यदि हां, तो उसका परिणाम क्या रहा। इसके अलावा, याचिका में समानता से संबंधित पैराग्राफ नहीं मिलने की बात भी दर्ज की गई है।
अनुलग्नकों की तारीख और केस नंबर में गड़बड़ी
रजिस्ट्री ने अनुलग्नक P2 की तारीख का रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने और अनुलग्नक P5 के केस नंबर में विसंगति की ओर ध्यान दिलाया है। अनुलग्नक P6 के लिए पेनड्राइव उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। पेज नंबर 57 और 64 की रंगीन प्रतियां जमा करने का निर्देश भी दिया गया है।
220 रुपये अतिरिक्त कोर्ट फीस जमा करने को कहा
रजिस्ट्री ने कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी बताई है। इसके अलावा, दस्तावेजों के धुंधले या छोटे फॉन्ट में होने, कुछ पेजों के गायब होने और पेजों के क्रम में विसंगतियों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इन कमियों को दूर कर स्पष्ट और व्यवस्थित दस्तावेज जमा करने होंगे।
आपत्तियां दूर होने के बाद आगे बढ़ेगी सुनवाई की प्रक्रिया
रजिस्ट्री की ओर से बताई गई कमियों को दूर करना याचिका की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है। हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियों का मतलब यह नहीं है कि याचिका खारिज कर दी गई है। आपत्तियां दूर होने और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही याचिका की सुनवाई के लिए सूचीबद्धता की स्थिति स्पष्ट होगी।
