RBI Survey On Inflation : महंगाई का डर अब ग्रामीण भारत के आर्थिक भरोसे को भी कमजोर करने लगा है। गांवों और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले परिवारों को आने वाले 1 साल में महंगाई और बढ़ने की आशंका सता रही है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा सर्वे में ग्रामीण परिवारों की महंगाई संबंधी उम्मीदें बढ़कर 7.9% पहुंच गई हैं। वहीं, मौजूदा आर्थिक हालात को लेकर लोगों का भरोसा भी कमजोर हुआ है। हालांकि, भविष्य को लेकर ग्रामीण परिवारों की उम्मीदें अब भी सकारात्मक बनी हुई हैं।
RBI के सितंबर 2026 के रूरल कॉन्फिडेंस सर्वे (Rural Consumer Confidence Survey) में सामने आए ये आंकड़े इसलिए अहम हैं, क्योंकि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति और खर्च का असर देश की खपत और बाजार की मांग पर पड़ता है। अगर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है, तो आने वाले समय में परिवार अपनी खरीदारी और बजट को लेकर ज्यादा सतर्क हो सकते हैं।
7.9% महंगाई का डर, आखिर क्या कहता है RBI सर्वे?
सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण परिवारों की अगले 1 साल की महंगाई संबंधी अपेक्षा 50 बेसिस पॉइंट बढ़कर 7.9% हो गई है। वहीं, मौजूदा महंगाई को लेकर उनकी धारणा 70 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.8% पर पहुंच गई। इसका मतलब है कि परिवारों को केवल अभी की कीमतों को लेकर ही चिंता नहीं है, बल्कि उन्हें आने वाले महीनों में भी महंगाई का दबाव बने रहने की आशंका है। हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। 7.9% देश की वास्तविक महंगाई दर नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की अगले 1 साल के लिए महंगाई संबंधी उम्मीद है। यानी यह आंकड़ा बताता है कि लोग भविष्य में कीमतों को लेकर क्या सोच रहे हैं।
मौजूदा आर्थिक हालात पर भरोसा क्यों कमजोर हुआ?
RBI का करंट सिचुएशन इंडेक्स (Current Situation Index) सितंबर में घटकर 90.6 पर आ गया। पिछले सर्वे राउंड में यह 91.7 था। यह इंडेक्स परिवारों के मौजूदा आर्थिक हालात को एक साल पहले की स्थिति से तुलना करके मापता है। CSI का 100 से नीचे होना मौजूदा स्थितियों को लेकर कुल मिलाकर नकारात्मक धारणा का संकेत देता है। सितंबर में सामान्य आर्थिक स्थिति, रोजगार, कीमतों और घरेलू आय जैसे संकेतकों पर लोगों की धारणा कमजोर हुई। इसका असर परिवारों के वित्तीय फैसलों पर पड़ सकता है। जब लोगों को महंगाई बढ़ने का डर होता है और आय को लेकर भरोसा कमजोर पड़ता है, तो वे बड़े खर्च करने से पहले सोच सकते हैं। हालांकि, सर्वे के आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि ग्रामीण खपत में गिरावट आ चुकी है।
खर्च के मोर्चे पर मिली थोड़ी राहत
सर्वे में एक राहत की बात भी सामने आई। RBI के मुताबिक, ज्यादातर आर्थिक संकेतकों पर धारणा कमजोर हुई, लेकिन खर्च इसका अपवाद रहा। यानी महंगाई की चिंता बढ़ने के बावजूद खर्च संबंधी धारणा में वैसी कमजोरी नहीं दिखी। यह संकेत बाजार के लिए अहम है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में मांग का रुख कंपनियों की बिक्री और कारोबार को प्रभावित कर सकता है। आगे खर्च बढ़ता है या परिवार अपने बजट में कटौती करते हैं, यह उनकी वास्तविक आय और कीमतों में बदलाव पर निर्भर करेगा।
भविष्य को लेकर उम्मीदें बरकरार
मौजूदा हालात को लेकर चिंता के बावजूद ग्रामीण परिवार आने वाले समय को लेकर पूरी तरह निराश नहीं हैं। RBI का Future Expectations Index (FEI) सितंबर में 112.8 पर रहा। पिछले सर्वे राउंड में यह 113.6 था। यह इंडेक्स 100 से ऊपर होने का मतलब है कि अगले 12 महीनों को लेकर परिवारों की कुल धारणा अब भी सकारात्मक है। लेकिन इसमें आई मामूली गिरावट बताती है कि भविष्य को लेकर आशावाद कुछ कमजोर हुआ है।
8,799 लोगों से लिया गया फीडबैक
RBI ने यह सर्वे 10 से 20 सितंबर 2026 के बीच कराया। इसमें देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के 8,799 लोगों को शामिल किया गया। सर्वे में आर्थिक स्थिति, रोजगार, कीमतों, घरेलू आय, खर्च और महंगाई से जुड़ी धारणाओं का आकलन किया गया।
