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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को मिली Z+ सिक्योरिटी, खुफिया एजेंसी के इनुपट के बाद के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 22, 2024, 06:47 PM IST

Mallikarjun Kharge Security: केंद्र सरकार ने खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। अब उन्हें जेड प्लस सुरक्षा घेरा मुहैया कराया जाएगा।

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मल्लिकार्जुन खड़गे की बढ़ाई गई सुरक्षा

Photo : BCCL

Mallikarjun Kharge Gets Z plus Security Cover: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सुरक्षा बढ़ाई गई है। अब उन्हें जेड प्लस सुरक्षा घेरा मुहैया कराया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने यह फैसला खुफया एजेंसियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद लिया है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष पर खतरे का जिक्र किया गया था। जानकारी के मुताबिक खड़गे के जेड प्लस सुरक्षा घेरे में सीआरपीएफ कमांडो की तैनाती की जाएगी।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जेड प्लस सुरक्षा घरे में सीआरपीएफ के 58 कमांडो वीआईपी की सुरक्षा में तैनात होते हैं। वीआईपी के काफिले के चारों ओर मजबूत सुरक्षा घेरा होता है, जिसमें 10 आर्म्ड स्टैटिक गार्ड और 6 पीएसओ एक समय में राउंड द क्लॉक होते हैं। वहीं 25 जवाब, 2 एस्कॉर्ट राउंड द क्लॉक, 5 वाचार्स दो शिफ्ट में होते हैं।

होने वाले हैं लोकसभा चुनाव

मल्लिकार्जुन खड़गे की सुरक्षा ऐसे समय पर बढ़ाने का फैसला किय गया है, जब देश में अगले कुछ महीनों में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में खड़गे देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं। इसके साथ ही वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में भी शामिल हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर थ्रेड परसेप्शन रिपोर्ट जारी की थी, जिसके आधार पर गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला लिया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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