Maharashtra civic polls : महायुति महाराष्ट्र में निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेगा। सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच बंद कमरे में करीब डेढ़ घंटी चली बैठक में इस पर फैसला हुआ। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक आधिकारिक बयान में कहा गया कि ठाणे, मुंबई सहित राज्य में होने वाला निकाय चुनाव महायुति मिलकर लड़ेगा। इस बैठख में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और शिवसेना के वरिष्ठ नेता रवींद्र चव्हाण भी मौजूद थे।
शिंदे ने दी 'गठबंधन धर्म' पालन करने की सलाह
शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे ने सोमवार को कहा कि महायुति आगामी नगर निगम और जिला परिषद चुनावों में एकजुट होकर लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों और मंत्रियों को सलाह दी कि वे "गठबंधन धर्म" का पालन करें और ऐसे किसी भी बयान या व्यवहार से बचें, जिससे भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन में टकराव हो।
जिला परिषद चुनाव महायुति गठबंधन के रूप में लड़ा जाएगा
शिंदे ने नागपुर में शिवसेना विधायकों और मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने 168 नगर परिषदों में अध्यक्ष और 4,000 पार्षदों के पदों के लिए चुनाव लड़ा। शिंदे ने कहा, 'नगर निगम और जिला परिषद चुनाव महायुति गठबंधन के रूप में लड़ा जाएगा। गठबंधन धर्म का पालन करें। कोई भी विवादास्पद बयान न दें या ऐसा कुछ भी न करें जिससे गठबंधन में टकराव हो।'
एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे
स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण में महायुति के सहयोगी दल महाराष्ट्र में कई स्थानों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ मामलों में प्रचार अभियान तीखा हो गया। जिसके कारण शिंदे को यह मुद्दा भाजपा की शीर्ष नेतृत्व के सामने उठाना पड़ा। बता दें कि निकाय चुनाव को लेकर महायुति में पिछले दिनों से खींचतान चल रहा था लेकिन दोनों बड़े नेताओं के बैठक के बाद सुलह का रास्ता निकल गया है।
विधानमंडल के अगले सत्र में वंदे मातरम पर होगी चर्चा
फडणवीस ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र विधानमंडल के अगले सत्र में राष्ट्र गीत वंदे मातरम पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि यह जरूरी है कि संसद में वंदे मातरम पर चर्चा हो। उन्होंने कहा, ‘वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवाद का एक मंत्र है। यह वह महामंत्र है, जिसने इस देश के आम आदमी को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। संसद में इस पर चर्चा होना जरूरी है, क्योंकि राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे हो रहे हैं। मुझे बहुत खुशी है कि संसद में इस पर चर्चा हो रही है।’
