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Maharashtra: अगर शिंदे और उनके विधायक होते हैं अयोग्य तो भी नहीं गिरेगी सरकार, समझें सीटों का गुणा गणित

Maharashtra Politics : शिवसेना के दोनों गुटों द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर फैसला देने वाले हैं। ऐसे में यदि एकनाथ शिंदे और उनके गुट के विधायक अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे तो भी सरकार को कोई खतरा नहीं है। इस रिपोर्ट में समझिए नंबर गेम।

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एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों का क्या होगा?

Photo : Times Now Digital

Eknath Shinde News: क्या एकनाथ शिंदे की कुर्सी खतरे में है? इस सवाल का जवाब महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले के बाद मिल जाएगा। दरअसल, शिवसेना के दोनों गुटों द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर स्पीकर नार्वेकर फैसला देने वाले हैं। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि शिंदे और उनके गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है तो महाराष्ट्र सरकार का भविष्य क्या होगा। आंकड़े कहते हैं कि यदि शिंदे गुट के सभी विधायक भी डिसक्वालिफाई हो जाते हैं, तो भी सरकार को कोई खतरा नहीं है। नीचे देखिए सारा गुणा गणित...।

महाराष्ट्र में सीटों का गुणा-गणित, देखें आंकड़े

  • बीजेपी - 105
  • शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) - 40
  • एनसीपी (अजित पवार गुट) - 36
  • 105+40+36 = 181
  • निर्दलीय और छोटी पार्टियों का समर्थन: 3+2+13+1+1 = 20
कुल सीट - 181+20 = 201

इन आंकडों से समझा जा सकता है कि भाजपा के पास कुल 105 विधायक हैं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में 40 विधायक हैं और अजित पवार गुट की एनसीपी के 36 विधायक हैं। छोटी पार्टियों की 20 सीटें मिलाकर कुल 201 विधायक महाराष्ट्र सरकार के पास हैं। यदि एकनाथ शिंदे और अन्य विधायक डिस्क्वालिफाई हो जाते है तब भी सरकार स्थिर रहेगी।

सरकार में अजित पवार के जुड़ जाने से आंकड़े मजबूत हैं। अकेले भाजपा और अजित पवार की एनसीपी के विधायक मिलाकर 141 सीटें बनी रहेंगी। अगर 5 सीटें छोटे दलों की सीटें जोड़ दिया जाएगा तो है, 161 सीटों के साथ आसानी से बहुमत बना रहेगा।

फैसले से पहले एकनाथ शिंदे ने क्या कहा?

अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले से पहले राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा कि संख्या बल उनके नेतृत्व वाली शिवसेना के पक्ष में है। शिंदे ने कहा कि यहां तक कि निर्वाचन आयोग ने भी माना है कि शिवसेना के अधिकांश विधायक उनके गुट के साथ हैं। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में संख्याएं महत्वपूर्ण होती हैं। हमारे पास विधानसभा और लोकसभा में बहुमत है। निर्वाचन आयोग ने हमारी पार्टी को आधिकारिक नाम और चिह्न आवंटित किया है। मुझे विश्वास है और मुझे उम्मीद है कि निर्णय योग्यता के आधार पर होगा।'

जून 2022 में, शिंदे और कई अन्य शिवसेना विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह कर दिया, जिससे शिवसेना में विभाजन हो गया और महा विकास आघाड़ी गठबंधन सरकार गिर गई। इसके बाद ठाकरे और शिंदे गुटों ने एक-दूसरे के विधायकों के खिलाफ याचिका दायर कीं और दलबदल रोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की। अविभाजित शिवसेना के 56 विधायकों में से 40 शिंदे के साथ हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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