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'अतीक डर लग रहा है क्या...' जब पत्रकारों ने पूछा सवाल, क्या था माफिया का जवाब; सामने आया video

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 27, 2023, 08:55 AM IST

अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से राजस्थान और मध्य प्रदेश होते हुए झांसी के रास्ते प्रयागराज लाया जा रहा है। उसका काफिला शिवपुरी में कुछ देर के लिए रुका था।

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अतीक अहमद

Photo : ANI

Atiq Ahmad News: डॉन अतीक अहमद को साबरमती जेल से सड़क के रास्ते प्रयागराज लाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस का काफिला राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश पहुंचा है। यहां शिवपुरी में यह काफिला कुछ देर रुका। इसके बाद पुलिस झांसी के रास्ते माफिया अतीक को प्रयागराज लेकर पहुंचेगी। अतीक अहमद के आज शाम तक प्रयागराज पहुंचने के आसार हैं। उसे कल उमेश पाल अपहरण मामले में विशेष अदालत में पेश किया जाना है।

इस सबके बीच अतीक अहमद का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें अतीक अहमद शिवपुरी में पुलिस के वाहन से उतरता दिख रहा है। सफेद साफे और काला कुर्ता पहने अतीक के माथे पर शिकन और चेहरे पर डर को साफ देखा जा सकता है। इस दौरान अतीक अहमद से पत्रकारों ने सवाल किया, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है।

अतीक डर लग रहा है क्या...

शिवपुरी में पुलिस के वाहन से बाहर निकलते ही अतीक से पत्रकारों ने सवाल किया- 'अतीक डर लग रहा है क्या...?' यह सवाल सुनकर अतीक भड़का हुआ दिखाई दिया। उसने गुस्से में जवाब दिया, 'काहे का डर'। हालांकि, अतीक इससे ज्यादा कुछ कहता, उससे पहले ही उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों ने उसे मीडिया से दूर कर दिया।

हमको प्रोग्राम मालूम है...

शिवपुरी में मीडिया के सामने भले ही अतीक ने इस तरह जवाब दिया हो कि उसे डर नहीं लगता, लेकिन उसके चेहते पर यूपी पुलिस का खौफ साफ झलक रहा है। साबरमती जेल से प्रयागराज के लिए निकलते से पहले से भी अतीक और उसके परिजन भी हत्या का अंदेशा जता चुके हैं। यहां तक कि अतीक का एक और वीडियो सामने आया था, जिसमें वह पुलिस के जवान से कहते हुए दिख रहा है कि हमको प्रोग्राम मालूम है, हत्या करना चाहते हो।

पहले मामले में हो सकती है सजा

माफिया अतीक के अपराध की दुनिया काफी खौफनाक है। उसका आतंक ऐसा था कि वह जिधर से गुजरता, लोग रास्ते बदल लेते। चश्मदीद भी उसके खिलाफ गवाही देने से डरते थे। अतीक पर हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी जैसे 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। हालांकि, एक भी मामले में उसे सजा नहीं हुई है। उमेश पाल के अपहरण का यह पहला मामला है, जिसमें अतीक को सजा सुनाई जा सकती है। इस मामले में कोर्ट की सुनवाई पूरी हो चुकी है, उसे मंगलवार को 11 बजे विशेष अदालत में पेश किया जाना है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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