कांग्रेस ने चंडीगढ़ से हरियाणा विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंका भाजपा के 10 साल के कार्यकाल के खिलाफ चार्जशीट जारी करेगी, क्योंकि पार्टी को ऐसा लगता है कि ये मुद्दे जनसरोकार के मुद्दे हैं और जनता कांग्रेस से कनेक्ट करेगी और वोट भी देगी।
कांग्रेस ने जारी की प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ चार्जशीट
हरियाणा मांगे हिसाब के नाम से हरियाणा कांग्रेस ने 11 जुलाई से अपने चुनावी कैंपेन का आगाज किया है, जिसमे मौजूदा बीजेपी सरकार से 15 सवाल किए गए हैं—
1. देश में सर्वाधिक बेरोज़गारी हरियाणा में क्यों?
2. देश में सर्वाधिक महंगाई हरियाणा में क्यों?
3. देश का सबसे असुरक्षित राज्य हरियाणा क्यों?
4. हरियाणा में घोटाले पे घोटाले क्यों?
5. जन विरोधी पोर्टलों से हरियाणा बेहाल क्यों?
6. अग्निवीर और कौशल निगम के तहत पक्की नौकरियाँ ख़त्म क्यों?
7. बीजेपी काल क्यों बना किसानों का काल
8. दलित और पिछड़ो की उपेक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन क्यों?
9. नशे में हरियाणा पंजाब से भी आगे क्यों?
10. ग़रीब, बाहरी कॉलोनीवासी और श्रमिक बदहाल क्यों?
11. हरियाणा में शिक्षकतंत्र बर्बाद क्यों?
12. हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओ का दिवालिया पीटा क्यों?
13. हर वर्ग पर लठिया और गोलियाँ बरसाई क्यों?
14. हरियाणा की अर्थव्यवस्था विकास की पटरी से उतरी क्यों?
15. 2014 और 2019 के घोषणा पत्र को भाजपा भूली क्यों?
इस कार्यक्रम के तहत हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान और नेता प्रतिपक्ष/पूर्व CM भूपिन्दर सिंह हुड्डा हर ज़िले का दौरा करेंगे वहीं लोकसभा सांसद दीपेन्द्र हुड्डा पदयात्रा करेंगे।

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कांग्रेस की चुनौती बीजेपी से ज़्यादा अपने ही नेता
हरियाणा लंबे समय से आपसी गुटबाज़ी का शिकार रही है, पिछले 10 साल में जो भी बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ी (कुलदीप विशनोई, किरण चौधरी) वो भूपिन्दर हुड्डा पर निशाना साधते हुए ये कहा कि हुड्डा ने कांग्रेस को व्यक्ति की पार्टी बना दी है, कई नेता हैं जो हुड्डा के ख़िलाफ़ बेबाक़ी से बोलते हैं ,वही हुड्डा के करीबी का दावा है कि पिछले 10 सालों में 150 के क़रीब पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।
चुनाव को देखते हुए प्रदेश की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने भी अलग से शहरों में पदयात्रा की घोषणा की है, वहीं कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाल भी हुड्डा से अलग लाइन रखते हैं सूत्रों का मानना है कि चुनाव प्रचार की घोषणा कार्यक्रम से इन नेताओ ने भी दूरी बना ली है।
कांग्रेस को रोकने के लिए इनेलो-बसपा ने भी की गठबंधन की घोषणा
विधानसभा चुनाव दिलचस्प होता दिख रहा है, एक तरफ़ बीजेपी सत्ता में तीसरी बार सत्ता में आने जद्दोजहद में दिख रही है वही जेजेपी सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर अलग राह इख़्तियार कर चुकी है वहीं कांग्रेस मान रही है कि बीजेपी के 10 साल के सरकार के ख़िलाफ़ लहर का फ़ायदा पार्टी को होगा। लेकिन आज बसपा-इनेलो का गठबंधन का ऐलान बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए चिंता का सबब बन गया है, इनेलो 53 और बसपा 37 सीटो पर चुनाव लड़ेगी जिसमें अभय चौटाला को CM का चेहरा बनाया गया, कांग्रेस-आप गठबंधन भी अधर में दिख रहा है
