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सिद्धू मूसेवाला की तरह सलमान खान की हत्या करना चाहता था लॉरेंस बिश्नोई, फिल्म शूटिंग या पनवेल फार्महाउस के बाहर होना था हमला

Salman Khan Shooting Case: गैंगेस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसका गैंग सलमान खान की सिद्धू मूसेवाला की तरह हत्या करना चाहता था। इसका खुलासा पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में किया गया है। कहा गया है कि सलमान खान पर हमला फिल्म की शूटिंग के दौरान या फिर पनवेल फार्म हाउस से बाहर निकलते वक्त होना था।

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Salman Khan

Photo : BCCL

Salman Khan Shooting Case: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गैंग सलमान खान की सिद्धू मूसेवाला की तरह हत्या करना चाहता था और इसके लिए प्लान तैयार किया जा रहा था। इस प्लानिंग में पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई की गैंग एके-47 और पाकिस्तानी हथियारों से सलमान खान की हत्या करना चाहता था। महाराष्ट्र की पनवेल पुलिस की ओर से दााखिल चार्जशीट में इसके संकेत मिले हैं।

पनवेल पुलिस ने अपनी खुफिया जांच में संदिग्धों के मोबाइल फोन टॉवर, लोकेशन, वाट्सएप चैट जैसे इनपुट्स की मदद से से खुफिया जानकारी जुटाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई का गैंग सलमान खान पर कथित हमला उनकी फिल्म की शूटिंग के दौरान करने वाला था या फिर यह हमला तब होता जब सलमान खान पनवेल फार्महाउस से बाहर निकलते। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिद्धू मूसेवाला की तरह उनकी गाड़ी को घेरकर एके-47 और पाकिस्तानी हथियारों से हमला किया जाना था।

350 पन्नों की चार्जशीट में 5 नाम

पनवेल पुलिस की ओर से बीते सप्ताह 350 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के 5 लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस के आरोपपत्र में अजय कश्यप(28), गौतम विनोद भाटिया(29), वास्पी महमूद खान उर्फ चाइना(36), रिजवान हसन उर्फ जावेद खान (25) और दीपक हवासिंह उर्फ जॉन वाल्मीकी (30) का नाम शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई ने इस गैंग को सलमान खान की हत्या के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी दी थी। बता दें, अप्रैल में पनवेल पुलिस इंस्पेक्टर नितिन ठाकरे को खुफिया जानकारी मिली थी कि लॉरेंस गैंग सलमान खान पर हमले की योजना बना रहा है।

प्लानिंग के लिए वॉट्सएप ग्रुप

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो गैंग सलमान खान की हत्या की प्लानिंग कर रही थी, उसमें 15 से 16 लोग थे। ये लोग एक वाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल करते थे, जिसमें गोल्डी बराड़ और अनमोन बिश्नोई भी शामिल था। इसके अलावा पुलिस ने पाकिस्तान के सुखा शूटर और डोगर भी पहचान कर ली है, जो एके-47, एम 16, एम5 जैसे हथियारों की सप्लाई करने वाले थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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