Gurugram News: बारिश के दौरान गुरुग्राम में बार-बार होने वाले जलभराव को लेकर केंद्रीय मंत्री और गुड़गांव से सांसद राव इंद्रजीत सिंह (Rao Inderjit Singh) ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Saini) से मुलाकात की। राव इंद्रजीत ने कहा कि जलभराव गुरुग्राम की हर साल की बड़ी समस्या बन चुका है। उन्होंने कहा, पिछले लगभग 20 सालों से शहर इस परेशानी का सामना कर रहा है। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस और कंक्रीट फैसले लेने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बारिश होते ही शहर के कई हिस्सों में पानी भर जाता है और यह स्थिति साल दर साल दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इस मामले में जिन कार्यों को पूरा नहीं किया गया या जहां लापरवाही हुई, वहां संबंधित अधिकारियों से जवाब और स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
पुराने नदी-नालों पर निर्माण से बिगड़ी निकासी व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने जलभराव के पीछे शहर के पुराने प्राकृतिक जल निकासी तंत्र में हुए बदलाव को बड़ी वजह बताया। उनके अनुसार, गुरुग्राम में पहले मौजूद कई नदी-नालों और प्राकृतिक जलमार्गों के ऊपर कॉलोनियां बस गईं, सड़कें बन गईं और कई स्थानों पर कब्जे हो गए हैं। इससे बारिश के पानी की प्राकृतिक निकासी प्रभावित हुई है।
राव इंद्रजीत ने कहा कि मौजूदा हालात में आबादी और निर्माण को हटाना व्यावहारिक समाधान नहीं है। इसलिए उन्होंने सरकार को आधुनिक तकनीक के जरिए पानी के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करने का सुझाव दिया है।
मेट्रो की की तरह पानी के लिए अंडरग्राउंड रास्ते
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि जिस तरह मेट्रो का नेटवर्क जमीन के नीचे से गुजरता है, उसी तरह बारिश और नदी-नालों के पानी की निकासी के लिए अंडरग्राउंड चैनल या ड्रेनेज कॉरिडोर विकसित किए जा सकते हैं। इसके लिए पर्याप्त बजट और व्यापक योजना की जरूरत होगी।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि जलभराव की समस्या का समाधान वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर होना चाहिए। इसके लिए IIT के विशेषज्ञों से भी चर्चा कर विस्तृत योजना तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक क्षेत्र में पानी की निकासी रोकने या बदलने से दूसरे इलाके में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में पूरे गुरुग्राम के जल निकासी तंत्र को ध्यान में रखते हुए समग्र समाधान तैयार करना होगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और विशेषज्ञों की मदद से तैयार दीर्घकालिक योजना से गुरुग्राम को हर साल होने वाले जलभराव से राहत मिल सकेगी।
