ETNow.in Business Conclave & Awards 2025: बिजनेस कॉन्क्लेव और अवार्ड्स 2025 में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनायक सहित कई नामी हस्तियां सम्मिलित हुईं। इस कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनायक ने राज्य के मौजूदा निवेश और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कोई भूमि विधायिका नहीं है। यहां पर जमीनों पर ट्राइब्स का प्रभाव है। उन्होंने कहा, ''हमने पहले ही सरकार को सलाह दी कि आपको एक भूमि सर्वेक्षण करने की जरूरत है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि गांव और जनजातीय समुदायों की जमीनें निश्चित ही उनके पास ही रहें, लेकिन राज्य सरकार के पास भी कुछ भूमि होनी चाहिए।''
अरुणाचल पूर्वोत्तर क्षेत्र का सबसे बड़ा राज्य है जिसकी आबादी सबसे कम है। राज्य में 26 जनजातियां और 100 उप-जनजातियां रहती हैं, जिनके पास यहां की अधिकांश भूमि है।
अरुणाचल प्रदेश में निवेश और भूमि सुधार
अरुणाचल प्रदेश में निवेश से जुड़े सवाल पर राज्यपाल ने कहा, ''अरुणाचल में हर कोई हिंदी बोलता है, हर कोई अंग्रेजी को फॉलो करता है। इसलिए, व्यापार करने में आसानी बहुत अधिक है। अरुणाचल में प्रॉपर लैंड लॉ नहीं है। कोई सर्वेक्षण नहीं होता है। भूमि पारंपरिक रूप से जनजातीय समुदायों और गांवों की है।"
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाया गया है। इसलिए उन्होंने अप्रत्यक्ष तरीके से कुछ सुधार किए गए हैं। उनके पास एक अधिनियम है जिसके तहत उन भूमि की पहचान की गई है जहां निवेशक आकर उद्योग लगा सकते हैं।
राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार उद्योग 50 साल के लिए जमीन 'लीज' पर ले सकते हैं, जबकि निवेशकों के लिए 99 साल की लीज की व्यवस्था की गई है, जिसकी बदौलत बड़े उद्योगों को आकर्षित किया जा सकेगा।
इसके अलावा, राज्यपाल ने भारत की सीमाओं की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों से मिल रहे समर्थन पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ''हम तीन देशों की सीमाओं से घिरे हुए हैं और स्थानीय लोग भारतीय सेना के साथ मजबूती से डटे हुए हैं। वे सेना का बहुत सम्मान करते हैं।''
उन्होंने यह भी बताया कि भारत के सभी सीमावर्ती गांवों में बिजली, नल का पानी और सड़क कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह सरकार की नीतियों और सेना के प्रयासों का नतीजा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास तेजी से हो रहा है।
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