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'गुंडों की तरह बात कर रहे हैं लालू यादव', जाति जनगणना पर BJP vs RJD; क्या है सारा माजरा

Bihar Politics: लालू यादव ने ऐसा क्या कह दिया कि भाजपा ने उनकी तुलना गुंडों से कर दी। सारा विवाद जाति आधारित जनगणना से जुड़ा है। भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लालू की टिप्पणी को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया। राजद सुप्रीमो ने ये दावा किया था कि इनको इतना मजबूर करेंगे कि इन्हें जातिगत जनगणना करना ही पड़ेगा।

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लालू प्रसाद यादव

Lalu Yadav vs BJP: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जाति आधारित गणना के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कथित टिप्पणी की जिसे लेकर मंगलवार को भाजपा और राजद नेताओं के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया।

लालू यादव ने क्यों कर दी औकात की बात?

भाजपा की बिहार इकाई के नेताओं ने राजद सुप्रीमो की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि वह ‘गुंडों की तरह बात कर रहे हैं’। इससे पहले दिन में जाति आधारित गणना के मुद्दे पर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकार और आरएसएस पर सीधा हमला करते हुए लालू प्रसाद ने कहा था, 'इन आरआरएस/भाजपा वाला का कान पकड़, दंड बैठक करा इनसे जातिगत जनगणना कराएंगे। इनका क्या औक़ात है जो ये जातिगत जनगणना नहीं करायेंगे? इनको इतना मजबूर करेंगे कि इन्हें जातिगत जनगणना करना ही पड़ेगा।'

'उनकी भाषा मूल रूप से गुंडों की भाषा है'

सिंगापुर में नियमित जांच के बाद पटना लौटे लालू ने सोशल मीडिया मंच एक पर लिखा, 'दलित, पिछड़ा, आदिवासी और गरीब का एकता दिखाने का समय अब आ चुका है।' लालू की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, 'राजद गुंडों की तरह बात कर रहा है...उनकी भाषा मूल रूप से गुंडों की भाषा है। उन्हें ये सब बंद कर देना चाहिए...हमें धमकाने की कोशिश न करें... हम ऐसी चीजों से नहीं डरते...आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता उन्हें और उनकी पार्टी को करारा जवाब देगी।'

इसी तरह की राय व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा, 'लालू प्रसाद खुद एक अभिशाप हैं...वे बिहार के लिए एक गाली हैं। लालू ने बिहार को क्या दिया है? उन्होंने राज्य की छवि खराब की है। हमने संकल्प लिया है कि बिहार को उन लोगों से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाएंगे जिन्होंने बिहारी शब्द को गाली बना दिया है।'

'झूठ बोल रहे हैं लालू यादव...'

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी सांसद संजय जायसवाल ने कहा, 'लालू यादव झूठ बोल रहे हैं...बिहार में जातिगत सर्वेक्षण हुआ था और भाजपा ने इसका समर्थन किया था...लालू यादव ऐसा क्यों कर रहे हैं? कांग्रेस शासित राज्यों में जहां जातिगत सर्वेक्षण नहीं हुआ है, वहां सवाल नहीं उठाना चाहिए। दरअसल लालू यादव को पता ही नहीं है कि क्या बोलना है।'

इस बीच, लालू प्रसाद के बयान का बचाव करते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव ने संवाददाताओं से कहा, 'भाजपा और आरएसएस के लोग आरक्षण के पूरी तरह खिलाफ हैं। यही कारण है कि वे देश में जातिगत जनगणना नहीं चाहते हैं। लालू जी ने जो भी कहा है, वह बिल्कुल सही है।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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