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'भगवान जी आप तो सब जानते हैं...', कोटा के मंदिर की दीवारों पर छात्रों ने लिखे भावुक संदेश, पढ़कर रो पड़ेंगे आप

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 29, 2023, 11:16 PM IST

Kota Suicide Case: आंकड़ों को देखें तो बीते 11 दिनों में कोटा में 4 आत्महत्याएं हो चुकी हैं। और गहराई में जाएं तो बीते 8 महीनों में 22 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले 1 साल में यह आंकड़ा 29 का है और बीते 10 सालों में 160 बच्चे जिंदगी को अलविदा बोल चुके हैं।

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कोटा के मंदिर में छात्रों द्वारा लिखे गए मैसेज

Kota Suicide Case: "भगवान जी आप तो सब जानते हैं कि मेरे मन में क्या है...सबसे पहले आप मेरी पूरी फैमिली को खुश रखना, उनके बीच हमेशा प्यार बनाए रखना। सबको खुश रखना भगवान, सब खूब तरक्की करें, खुश रहें... भगवान जी मैं बहुत मेहनत करूंगी, आप इसका फल मुझे और मेरी फैमिली को जरूर देना।"

ऊपर लिखी ये लाइनें न तो हमनें लिखी हैं और न ही ये किसी कहानी से ली गई हैं। ये किसी फिल्म के डॉयलाग का हिस्सा भी नहीं हैं। ये लाइनें उन स्टूडेंट्स की हैं, जिनके नाजुक से कंधों पर उम्मीदों का भारी बोझ डाल दिया गया है। राजस्थान के कोटा शहर, जिसे कोचिंग सेंटर्स का हब भी बोला जाता है, वहां के मंदिरों पर ऐसी तमाम लाइनें लिखी मिल जाएंगी।

कोचिंग सेंटर्स आने वाले बच्चों ने लिखी हैं हजारों विश

कोटा में NEET या IIT की तैयारी करने वाले बच्चे किस तरह उम्मीदों तले दबे होते हैं, ये उनकी इन भावनाओं में बखूबी पढ़ा जा सकता है। कोचिंग सेंटर्स के पास स्थित एक मंदिर में ऐसी हजारों विश छात्रों द्वारा लिखी गई है। कोई स्टूडेंट्स यहां भगवान से घरवालों की खुशहाली मांगता दिखता है तो कोई अपनी तरक्की। कुल मिलाकर इन भावनाओं को पढ़कर किसी की भी आंखों में आंसू आ जाएंगे।

24 घंटे में दो आत्महत्यांए

बीते दिनों कोटा से झकझोर देने वाली खबर सामने आई। यहां आत्महत्या के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। बीते दिनों 24 घंटे के अंदर दो छात्रों के सुसाइड की खबर ने एक बार फिर लोगों का ध्यान कोटा शहर की तरफ खींचा है। आंकड़ों को देखें तो बीते 11 दिनों में यहां 4 आत्महत्याएं हो चुकी हैं। और गहराई में जाएं तो बीते 8 महीनों में 22 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले 1 साल में यह आंकड़ा 29 का है और बीते 10 सालों में 160 बच्चे जिंदगी को अलविदा बोल चुके हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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