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इस शख्स का था वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने का आइडिया, चुनौतियों से नहीं हारा, लड़ा दी जान

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated May 19, 2023, 04:09 PM IST

क्या आप जानते हैं कि देश में वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने का विचार किसके मन में आया था। आज हम आपको उसी शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

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सुधांशु मणि

Sudhanshu Mani: देश को 18वीं वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात मिल चुकी है। गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के पुरी से प. बंगाल के हावड़ा के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ओडिशा की यह पहली वंदे भारत एक्सप्रेस है। वंदे भारत ट्रेन आज के दौर में रेलवे की ताकत बन चुकी है। लगातार इसके नेटवर्क में इजाफा करते हुए देश के कोने-कोने में इसकी शुरुआत की जा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने का विचार किसके मन में आया था। आज हम आपको उसी शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने का श्रेय

38 साल के करियर वाले भारतीय रेलवे के इंजीनियरिंग अधिकारी सुधांशु मणि ही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के मास्टरमाइंड हैं। लगभग 18 महीने के भीतर ही ट्रेन की डिलीवरी सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। जब वे चेन्नई की इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री में महाप्रबंधक थे, सेमी-हाई स्पीड ट्रेन उनका एक सपना था। उन्होंने एक स्व-चालित ट्रेन की कल्पना की थी जो 180 किमी की गति से चल सकती हो और आयातित सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों की आधी कीमत पर मिल सके।

2016 में दिया ट्रेन का आइडिया

2016 में जब रेलवे एक सेमी-हाई स्पीड ट्रेन आयात करने की योजना बना रहा था, तब सुधांशु इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में महाप्रबंधक बने। उन्होंने स्वदेशी तकनीक के साथ एक सेमी-हाई स्पीड ट्रेन विकसित करने का विचार पेश किया जो कि लागत प्रभावी होने के साथ-साथ गति और गुणवत्ता के मामले में भी आयातित ट्रेनों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके। इस प्रस्ताव को शुरू में रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से संदेह हुआ, लेकिन सुधांशु अपनी बात पर डटे रहे और परियोजना को मंजूरी दे दी गई।

सामने आईं कई चुनौतियां

सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था ट्रेन-18 के लिए सेमी-हाई स्पीड बोगियों का फ्रेम तैयार करना। सुधांशु को कानपुर में एक कंपनी मिली जो फ्रेम बना सकती थी और इसे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री को सौंप दिया। 50 रेलवे इंजीनियरों और 500 फैक्ट्री कर्मचारियों की एक टीम ने तब वंदे भारत के प्रोटोटाइप रैक को केवल 18 महीनों में डिजाइन और तैयार करने के लिए लगातार काम किया।

पहले ट्रेन-18 था इसका नाम

वंदे भारत एक्सप्रेस के डिजाइन में तेज गति हासिल करने के लिए बोगियों के नीचे इंजन लगाने के लिए जगह शामिल की गई थी। डिजाइन तैयार करते समय टीम के सामने यह सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी। इस ट्रेन का नाम पहले ट्रेन 18 रखा गया था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर वंदे भारत एक्सप्रेस कर दिया गया। आज वंदे भारत ट्रेन अपनी गति और सुविधाओं के साथ देश की सबसे तेज गति की ट्रेन बन गई है। अब तक 18 ट्रेन शुरू की जा चुकी है और इसे देश के कोने-कोने में शुरू करने की योजना है।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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