EC Row: देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष आयोग पर हमलावर हो गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, कई फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे, जिस पर दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाए थे।
इस मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला और उन पर चुनावों में 'मैच फिक्सिंग' करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के उस दावे का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि ज्ञानेश कुमार ने 2016 में आईएएस अधिकारी रहते हुए उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। राहुल गांधी के इस गंभीर बयान के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला। रिजिजू ने साफ कहा कि सार्वजनिक मंचों पर राहुल गांधी की ऐसी बयानबाजी को तूल देना बिल्कुल उचित नहीं है, क्योंकि इससे समाज में गलत और नकारात्मक संदेश जाता है।
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10 महीनों में लिखी गई चिट्ठियां हो सार्वजनिक-प्रमोद तिवारी
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के मंत्री मनोज कुमार पांडे ने भी चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है, जिससे विपक्ष के मनगढ़ंत आरोपों का अंत हो चुका है। हालांकि, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पारदर्शिता की मांग उठाते हुए कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा 10 महीनों में लिखी गई चिट्ठियों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने तीखा सवाल किया कि आखिर उन पत्रों में क्या चिंताएं जताई गई थीं और भाजपा को यह साफ करना चाहिए कि ज्ञानेश कुमार उनके प्रतिनिधि की तरह काम कर रहे हैं या नहीं।
चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को सिरे से किया खारिज
इस पूरे बवाल के बीच चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े तमाम फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र एक प्रतिनियुक्त अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था और इसका आयोग की किसी नीति या आईटी प्रभाग से कोई संबंध नहीं है।
