Kerala High Court Pakistani Wife Visa Plea: केरल हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी नागरिकों के प्रवेश नियमों पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल एक भारतीय नागरिक से शादी करने मात्र से किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश करने या वीजा हासिल करने का कोई कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं मिल जाता। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने संयुक्त रूप से दायर याचिका (उनाईस कडुम्बोटिल व अन्य बनाम भारत संघ) को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
अदालत में दायर याचिका के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:
शादी में शामिल होने की थी मांग: याचिकाकर्ता (भारतीय नागरिक पति और उसकी पाकिस्तानी नागरिक पत्नी) वर्तमान में दुबई में रहते हैं। महिला भारत में अपने देवर की शादी में शामिल होने के लिए वीजा की मांग कर रही थी।
आवेदन न कर पाने की शिकायत: ऑनलाइन पोर्टल पर पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा आवेदन स्वीकार न होने के बाद दंपती ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया था।
अनुच्छेद 14 और 21 का दिया हवाला: याचिकार्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि एक भारतीय नागरिक की पत्नी होने के नाते उसे वीजा न देना और आवेदन स्वीकार न करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है।
केंद्र का रुख और 'सुरक्षा चिंताएं'
केंद्र सरकार के वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि विदेशी नागरिकों का देश में प्रवेश पूरी तरह से केंद्र सरकार के विवेक और सुरक्षा नीतियों पर निर्भर करता है:
पहलगाम आतंकी हमला और वीजा निलंबन: अदालत ने संज्ञान लिया कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उभरी सुरक्षा चिंताओं के कारण केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सभी प्रकार की वीजा सेवाएं पूरी तरह से निलंबित कर दी थीं।
फॉरेनर्स एक्ट, 1946: विदेशियों से संबंधित अधिनियम (Foreigners Act, 1946) की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों के आगमन, ठहराव और रवानगी को नियंत्रित करने का असीमित और विशेष अधिकार प्राप्त है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
मामले को खारिज करते हुए जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने स्पष्ट कहा:
वीजा जारी करना एक संप्रभु कार्य: विदेशी नागरिकों को वीजा जारी करना या न करना देश की संप्रभुता, अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा मामला है।
अनुच्छेद 14 और 21 पर स्पष्टीकरण: अदालत ने याचिकाकर्ताओं की संवैधानिक अधिकारों वाली दलील को खारिज करते हुए कहा कि हालांकि अनुच्छेद 14 गैर-नागरिकों पर भी लागू होता है, लेकिन इसका दावा केवल भारत की सीमा के भीतर मौजूद व्यक्ति द्वारा ही किया जा सकता है, देश से बाहर बैठे विदेशी नागरिक द्वारा नहीं।
जब तक 25 अप्रैल 2025 का वीजा निलंबन आदेश प्रभावी है, तब तक कोई भी पाकिस्तानी नागरिक वीजा आवेदन पर विचार करने का कानूनी दावा नहीं कर सकता।
