Karnataka CM Post Tussle: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की बढ़ती अटकलों के बीच, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार गुरुवार सुबह 9 बजे बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आधिकारिक आवास 'कावेरी' में उनके द्वारा बुलाई गई ब्रेकफास्ट बैठक में शामिल होंगे। यह बैठक दिल्ली में कर्नाटक के नेताओं और कांग्रेस आलाकमान के बीच हुई जोरदार चर्चाओं के एक दिन बाद हो रही है, जिससे राज्य के सबसे बड़े पद पर संभावित बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को सिद्धारमैया और शिवकुमार ने अलग-अलग कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला से छह घंटे से ज्यादा समय तक मुलाकात की।
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा, 'राहुल गांधी ने कथित तौर पर सिद्धारमैया से पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की कोई भूमिका निभाने पर विचार करने और एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने नेतृत्व में बदलाव की योजना के तहत कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए राज्यसभा में एक सीट की संभावना पर भी चर्चा की है।'
दिल्ली में हुई बैठकों के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, केसी वेणुगोपाल ने नेतृत्व में बदलाव की खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि चर्चाएं केवल आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों तक ही सीमित थीं। उन्होंने इन रिपोर्टों को अटकलें करार दिया। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया ने यह स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, जबकि राहुल गांधी पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए इस अनुभवी OBC नेता को राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहते थे।
इन ताजा घटनाक्रमों को शिवकुमार के लिए एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। शिवकुमार लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब उनसे बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनने का वादा किया गया था।
कांग्रेस नहीं चाहता राजस्थान जैसा संकट
वहीं, सिद्धारमैया ने कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले अपने वफादार साथियों से सलाह-मशविरा करने के लिए कुछ समय मांगा है। दिल्ली से लौटने के बाद बेंगलुरु में इस विषय पर चर्चा जारी रहने की उम्मीद है। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व एक ऐसे आपसी सहमति वाले सत्ता-हस्तांतरण की दिशा में काम कर रहा है, ताकि पार्टी के पिछले शासनकाल के दौरान राजस्थान में पैदा हुए संकट जैसी आंतरिक अस्थिरता से बचा जा सके।
