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इस राज्य में महंगा हुआ बसों का सफर, मंत्रिमंडल ने 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने का किया फैसला

Karnataka News: कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बस किराया 15 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया। मंत्री ने कहा, ‘‘हमने 13 प्रतिशत से 15 प्रतिशत के बीच की वृद्धि पर चर्चा की और मंत्रिमंडल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में मौजूदा कीमतों को देखते हुए 15 प्रतिशत के फैसले पर पहुंचा। पंद्रह प्रतिशत की वृद्धि के बाद भी कर्नाटक में किराया इन राज्यों की तुलना में कम ही होगा।’’

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कर्नाटक में बढ़ा बसों का किराया।

Karnataka Bus Fares Hike: कर्नाटक मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के स्वामित्व वाले परिवहन निगमों के बस किराये में 15 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया। कर्नाटक के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने कहा कि ईंधन की कीमतों और कर्मचारियों पर खर्च में वृद्धि जैसी परिचालन लागत में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

बस किराये में 15 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया

मंत्री पाटिल ने मीडिया से बातचीत कहा, ‘‘मंत्रिमंडल ने चार राज्य परिवहन निगमों- कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी), उत्तर पश्चिम कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (एनडब्ल्यूकेआरटीसी), कल्याण कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (केकेआरटीसी) और बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) के बस किराये में 15 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है।’’ मंत्री ने कहा कि यह निर्णय पांच जनवरी से लागू होगा।

उन्होंने कहा कि बीएमटीसी का बस किराया 10 जनवरी, 2015 को बढ़ाया गया था जब डीजल की कीमत 60.90 रुपये प्रति लीटर थी। पाटिल ने बढ़ोतरी को उचित ठहराते हुए कहा, ‘‘चारों निगमों की रोजाना डीजल खपत 10 साल पहले 9.16 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 13.21 करोड़ रुपये हो गई है। इन चारों निगमों में कर्मचारियों पर प्रतिदिन 12.95 करोड़ रुपये का खर्च होता था, जो बढ़कर 18.36 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गया है। इसलिए संशोधन जरूरी था।’’

गैर-लक्जरी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा

उन्होंने कहा कि ‘शक्ति’ गारंटी योजना जारी रहेगी। ‘शक्ति’ योजना के तहत पूरे राज्य में सरकारी स्वामित्व वाली गैर-लक्जरी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जाती है। मंत्री ने कहा, ‘‘हमने 13 प्रतिशत से 15 प्रतिशत के बीच की वृद्धि पर चर्चा की और मंत्रिमंडल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में मौजूदा कीमतों को देखते हुए 15 प्रतिशत के फैसले पर पहुंचा। पंद्रह प्रतिशत की वृद्धि के बाद भी कर्नाटक में किराया इन राज्यों की तुलना में कम ही होगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये तक के सभी भविष्य निधि बकाये का भुगतान कर दिया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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