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कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस में बड़े धमाके की थी साजिश! मिठाई के डिब्बे में मिला बारूद

Kalindi Express hits LPG cylinder in Kanpur: कानपुर में बिल्हौर रेलवे स्टेशन के पास कालिंदी एक्सप्रेस को उड़ाने की साजिश रची गई थी। पुलिस को एक मिठाई का डिब्बा मिला है, जिसमें बारूद था। इसके बाद पुलिस ने मिठाई विक्रेता से पूछताछ की है और फारेंसिक टीम से भी मदद ली जा रही है।

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कालिंदी एक्सप्रेस को उड़ाने की थी साजिश।

Photo : Times Now Digital

Kalindi Express hits LPG cylinder in Kanpur: कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश में बड़ा खुलासा हुआ है। इस ट्रेन को उड़ाने का साजिश रची गई थी। पुलिस को घटनास्थल के पास से एक मिठाई का डिब्बा मिला है, जिसमें बारूद रखा गया था। पुलिस ने इस डिब्बे को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। यह मिठाई का डिब्बा कन्नौज की एक मिठाई स्वीट्स का बताया जा रहा है, जिसके बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम ने मिठाई विक्रता से भी पूछताछ की है।

बता दें, कानपुर जिले में आज सुबह कालिंदी एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश का खुलासा हुआ था। बिल्हौर रेलवे स्टेशन के पास प्रयागराज से भिवानी जा रही कालिंदी एक्सप्रेस के चालक ने पटरी पर अज्ञात लोगों द्वारा रखा गया रसोई गैस सिलिंडर देखकर आपातकालीन ब्रेक लगाया और एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) हरीश चंद्र ने बताया कि आठ/नौ सितंबर की दरमियानी रात को प्रयागराज से भिवानी जा रही कालिंदी एक्सप्रेस के चालक ने बिल्हौर रेलवे स्टेशन से कुछ दूर पहले पटरी पर एक रसोई गैस सिलिंडर रखा देखा।

सिलिंडर से टकराई ट्रेन

अधिकारी ने बताया कि चालक ने सिलिंडर देखकर आपातकालीन ब्रेक लगा दिया, मगर ट्रेन की टक्कर सिलिंडर से हो गई और वह थोड़ी दूर जाकर रुक गयी तथा सिलिंडर भी उछलकर दूर जा गिरा। अधिकारी ने कहा कि गनीमत रही कि सिलिंडर इंजन में फंसकर फटा नहीं, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। साथ ही अचानक आपातकालीन ब्रेक लगने से ट्रेन पटरी से उतर भी सकती थी। ट्रेन करीब 20 मिनट तक घटनास्थल पर रुकी रही और जांच के लिए इसे फिर से बिल्हौर स्टेशन पर रोका गया।

पेट्रोल से भरी बोतल भी बरामद

सूचना मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। मामले को सुलझाने में उनकी मदद के लिए फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भी मामले की जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि घटनास्थल के पास क्षतिग्रस्त सिलिंडर के अलावा पेट्रोल से भरी बोतल और माचिस सहित कई संदेहास्पद चीजें भी बरामद की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि उन लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्होंने ट्रेन को पटरी से उतारने के इरादे से गैस सिलिंडर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री पटरियों पर रखी थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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