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क्या सोमनाथ का प्रमोशन रोकना चाहते थे सिवान? चंद्रयान-2 क्यों हुआ था फेल, ISRO Chief सोमनाथ की किताब में कई खुलासे!

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 4, 2023, 05:03 PM IST

ISRO Chief S Somanath: इसरो प्रमुख ने कहा है कि हर इंसान को किसी संस्थान में शीर्ष पद तक पहुंचने के लिए कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उन्होंने भी जीवन में ऐसी कठिनाइयों का सामना किया है। उन्होंने चंद्रयान-4 की विफलता को लेकर भी दावा किया है।

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इसरो चीफ एस सोमनाथ

Photo : ANI

ISRO Chief S Somanath: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) डॉ. एस सोमनाथ की एक किताब को लेकर हंगामा मचा हुआ है। उनकी आत्मकथा 'निवालु कुडिचा सिम्हंल' को लेकर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने इसमें इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के सिवान और चंद्रयान-2 के असफल होने को लेकर कई खुलासे किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सोमनाथ ने अपनी किताब में कहा है इसरो के पूर्व प्रमुख सिवान ने उनके प्रमोशन में अड़ंगा लगाया था। इतना ही नहीं उनके इसरो प्रमुख बनने में भी बाधा डाली थी।

अब एस. सोमनाथ ने इन आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। समचार एजेंसी PTI से बातचीत में उन्होंने कहा है कि उनकी आत्मकथा में किसी व्यक्ति विशेष को लेकर बात नहीं कही गई है। उन्होंने कहा है कि आत्मकथा में उन चुनौतियों का जिक्र है, जिसका सामना हर किसी को करना पड़ता है।

ऊंचे पद पर आती हैं कई चुनौतियां

इसरो प्रमुख ने कहा है कि हर इंसान को किसी संस्थान में शीर्ष पद तक पहुंचने के लिए कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उन्होंने भी जीवन में ऐसी कठिनाइयों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि मैंने अंतरिक्ष एजेंसी में अपनी दशकों लंबी यात्रा के दौरान सामना की गई कुछ चुनौतियों का उल्लेख अपनी आगामी आत्मकथा, "निलावु कुदिचा सिम्हंल" में किया है, लेकिन यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। सोमनाथ ने कहा कि किसी भी संस्थान में ऊंचे पद के लिए कई लोग उपयुक्त होते हैं। मैं बस इस मुद्दे को उठा रहा था। उन्होंने कहा, मैंने यह आत्मकथा लोगों को प्रेरित करने के लिए लिखी है ताकि लोग अपनी चुनौतियां से लड़ते हुए आगे बढ़ें।

चंद्रयान-2 के फेल होने पर किया खुलासा

इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पुस्तक में चंद्रयान-2 मिशन की विफलता की घोषणा के संबंध में स्पष्टता की कमी का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा, लैंडिंग के समय यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया था कि संचार विफलता हो गई है और यह दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा। उन्होंने कहा, चंद्रयान-2 के फेल होने की घोषण के समय जो गलतियां हुई थीं, वो छिपाई गई थीं। सोमनाथ ने कहा, मेरा मानना है कि यह बताना एक अच्छी परंपरा है कि वास्तव में क्या हुआ है। इससे संगठन में पारदर्शिता बढ़ेगी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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