जम्मू कश्मीर: आतंकवाद से संबंध के संदेह में पांच और सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, अब तक 85 लोगों की गई नौकरी
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Jan 13, 2026, 05:21 PM IST
Kashmir Terrorism Link: कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(सी) के तहत सेवा से बर्खास्त किया गया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह यह सुनिश्चित होने पर कि राज्य की सुरक्षा के हित में औपचारिक जांच कराना उचित नहीं है, किसी सरकारी कर्मचारी को बिना जांच के बर्खास्त या पद से हटा सकता है।
जम्मू कश्मीर: आतंकवाद से संबंध के संदेह में पांच और सरकारी कर्मचारी बर्खास्त (PTI)
Jammu Kashmir News: जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद से संबंध के संदेह में मंगलवार को पांच सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। उपराज्यपाल के प्रशासन ने 2020 से अब तक ऐसे 85 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया है, जिन्हें आतंकवादी समूहों के लिए काम करते पाया गया था।एक अधिकारी ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी तंत्र के भीतर मौजूद आतंकवादी तंत्र और उसके बुनियादी ढांचे की जड़ों को निशाना बनाना है। अधिकारी ने बताया, 'बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षक मोहम्मद इशफाक, प्रयोगशाला तकनीशियन तारिक अहमद राह, सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर, वन विभाग में वन क्षेत्र कर्मी फारूक अहमद भट और स्वास्थ्य विभाग में चालक मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं।'
अधिकारियों ने बताया कि इन कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(सी) के तहत सेवा से बर्खास्त किया गया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास यह शक्ति होती है कि वह यह सुनिश्चित होने पर कि राज्य की सुरक्षा के हित में औपचारिक जांच कराना उचित नहीं है, किसी सरकारी कर्मचारी को बिना जांच के बर्खास्त या पद से हटा सकता है।
लश्कर के लिए काम करता कर्मचारी
बर्खास्त कर्मचारियों के खिलाफ तैयार दस्तावेज के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग में 'रहबर-ए-तालीम' के रूप में नियुक्त और बाद में 2013 में शिक्षक के रूप में नियमित किए गए मोहम्मद इशफाक पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के लिए काम कर रहा था।
दस्तावेज के मुताबिक, वह एलईटी के कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के लगातार संपर्क में था, जिसे पाकिस्तान से काम करने वाले एक आतंकवादी के रूप में चिन्हित किया गया है। एलईटी ने इशफाक को सक्रिय भूमिका सौंपी थी और उसे 2022 की शुरुआत में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या को अंजाम देने का काम सौंपा गया था।
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने इशफाक की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की और लगातार निगरानी में यह सामने आया कि एलईटी के कुछ 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (ओजीडब्ल्यू) आतंकवादी गतिविधियों में उसकी मदद कर रहे थे। अप्रैल 2022 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे योजना को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया।
लैब तकनीशियन भी निकाला गया
अधिकारियों के मुताबिक, लैब तकनीशियन तारिक अहमद राह बहुत कम उम्र से ही आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के प्रभाव में आ गया था। उन्होंने कहा कि 2005 में हिज्बुल आतंकवादी अमीन बाबा के पाकिस्तान भागने की जांच के दौरान राह के आतंकवाद से संबंध सामने आए।
अधिकारियों ने कहा, 'राह ने आतंकवादी को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराने में मदद की। उसकी साजिश के कारण अमीन बाबा सफलतापूर्वक पाकिस्तान पहुंच गया और फिलहाल वहीं से भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।'
लाइनमैन की भी गई नौकरी
पीएचई विभाग में सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर को 1996 में नियमित किया गया था। सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद बशीर बांदीपुरा के गुरेज इलाके में एलईटी का सक्रिय ओजीडब्ल्यू बन गया। अधिकारियों के अनुसार, बशीर लंबे समय से गुरेज के अंदरूनी इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों में मदद कर रहा था।
हिज्बुल के लिए काम करता भट
वन विभाग में फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट भी हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा था। वह अनौपचारिक रूप से एक पूर्व विधायक का निजी सहायक भी था, जिसके हिज्बुल मुजाहिदीन से संबंध बताए जाते हैं।
एक चालक की भी गई नौकरी
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में चालक मोहम्मद यूसुफ आतंकवादियों खासकर पाकिस्तान में रहने वाले हिज्बुल आतंकवादी बशीर अहमद भट के लगातार संपर्क में था। अधिकारियों ने कहा, 'बशीर के निर्देश पर यूसुफ ने पाकिस्तान में बैठे हिज्बुल के सदस्यों से संपर्क स्थापित किया और उन्हें हथियार व गोला-बारूद की खरीद तथा गांदरबल जिले के इलाकों में धन पहुंचाने जैसे अहम काम सौंपे गए।' 20 जुलाई 2024 को पुलिस ने एक वाहन को रोका, जिसमें यूसुफ और उसका सहयोगी एहसान हमीद यात्रा कर रहे थे। तलाशी के दौरान उनके पास से एक पिस्तौल, गोला-बारूद, एक ग्रेनेड और पांच लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
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