Trump Targeting India : रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। इस अतिरिक्त टैरिफ के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। ट्रंप का कहना है कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ के रूप में 'जुर्माना' लगा है। हालांकि, जानकार मानते हैं कि इस अतिरिक्त टैरिफ का अर्थव्यवस्था से लेना-देना कम और जियोपॉलिटिक्स से ज्यादा है। एक्सपर्ट का मानना है कि ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का श्रेय लेते आए हैं लेकिन कुछ समय से भारत ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध करना शुरू किया है। ऐसा लगता है कि यह बात ट्रंप को बुरी लगी और उन्होंने टैरिफ के जरिए भारत पर दबाव बनाने और उसे परेशान करने के लिए कदम उठाए।
श्रेय देने से चीन ने मना नहीं किया-कुगलमैन
यह पूछे जाने पर कि रूस से तेल खरीदे जाने पर ट्रंप केवल भारत पर टैरिफ लगा रहे हैं, इसके लिए उन्होंने चीन पर टैरिफ नहीं लगाया है। इस सवाल का जवाब देते हुए विल्सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डाइरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, 'चीन वह देश नहीं है जिसने सीजफायर का श्रेय देने से ट्रंप को मना किया। फोन पर चीन के नेता से ट्रंप की लंबी बातचीत नहीं हुई थी और उसने ट्रंप को यह नहीं बताया कि क्या सही है और क्या गलत। ये सारी चीजें भारत के साथ हुईं। इसलिए मुझे लगता है कि शायद राष्ट्रपति ट्रंप व्यापार और टैरिफ के मुद्दे पर भारत और भारतीय सरकार के प्रति अपनी सबसे तीखी नाराजगी दिखा सकते हैं। आज चाहे जो भी कहें, यह वास्तव में दोहरा मानदंड है। यह पाखंड है।'
'भारत-अमेरिका रिश्ते पर टैरिफ का पड़ेगा असर'
कुगलमैन ने आगे कहा कि भारत पर ट्रंप अतिरिक्त टैरिफ लगा रहे हैं और इसे देखकर उन्हें हैरानी नहीं हुई है। एक्सपर्ट ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते पर इस टैरिफ का 'नकारात्मक प्रभाव' पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि बीते दो दशकों की रणनीतिक भागीदारी का यह सबसे बुरा दौर है। मैं यह कहूंगा कि इस संबंध को सुधारने की संभावनाएं हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों के बीच स्वाभाविक, साझा हित और रणनीतिक मेलजोल है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह एक बहुआयामी संबंध है जिसमें कई अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग है। यह सहयोग समानांतर रूप से चल रहे हैं और ये व्यापक संबंधों पर आने वाले झटकों को सहने की क्षमता रखते हैं।'
पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या की
बता दें कि बीत 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने 26 लोगों की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत ने छह-सात मई की रात 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों के कुल 9 ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें बर्बाद किया। भारत की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों एवं रिहायशी इलाकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन एवं मिसाइल से हमले किए। इन हमलों को भारत की वायु रक्षा प्रणालियों ने नाकाम कर दिया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमले कर उन्हें नुकसान पहुंचाया। भारतीय हमलों के बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया।
ट्रंप के सीजफायर के दावे को भारत ने खारिज किया
संघर्ष रोकने के लिए पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से गुहार लगाई। दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत के बाद 10 मई को सीजफायर का ऐलान हुआ। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि उन्होंने व्यापार पर बेहतर डील करने का वादा कर दोनों देशों के बीच सीजफायर करवाया। भारत इस दावे को खारिज करता आया है। बीते दिनों संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर कहा कि सीजफायर के लिए दुनिया के किसी नेता ने नहीं कहा। पीएम ने ट्रंप का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनका इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ था।
पीएम मोदी-ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई-जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी लोकसभा में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा, 'मैं दो बातें बिलकुल स्पष्ट करना चाहता हूं, पहला, अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में व्यापार और जो कुछ भी चल रहा था, उसके बीच कोई संबंध नहीं था। दूसरा, 22 अप्रैल से लेकर 17 जून तक प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई कॉल नहीं हुई। 22 अप्रैल को ट्रंप ने संवेदना व्यक्त करने के लिए कॉल किया था और 17 जून को जब उन्होंने फिर कॉल किया, तब प्रधानमंत्री कनाडा में थे और उन्होंने बताया कि वह क्यों नहीं मिल सके।'
'भारत मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता'
विदेश मंत्री के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के साथ 35 मिनट की फोन कॉल के दौरान दृढ़ता से कहा कि भारत मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता और न ही कभी करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सैन्य कार्रवाइयों को रोकने को लेकर जो बातचीत हुई, वह इस्लामाबाद के अनुरोध पर शुरू हुई थी और नई दिल्ली ने उसे सहमति दी थी।
