Sawal Public Ka: खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के सामने पंजाब की भगवंत मान सरकार घुटने टेकती दिख रही है। पिछले दो दिनों से पूरे देश में लोग बात कर रहे हैं कि पंजाब को क्या हो गया? पंजाब क्या गलत हाथों में चला गया। पंजाब क्या गलत हाथों में खेल रहा है। लेकिन दूसरी तरफ किडनैपिंग केस में अमृतपाल के साथी लवप्रीत सिंह तूफान के सारे आरोप वापस लिए गए। कोर्ट से लवप्रीत सिंह तूफान की रिहाई पर मुहर लगवा ली गई। वैसे ये आदेश कोर्ट का है मैं उस पर टिप्पणी नहीं कर रही लेकिन पंजाब पुलिस का रवैया ऐसा दिखा रहा है कि लाचार, बेसहाय हो। उसे बोला जा रहा हो कि चुपचाप जो कहते हैं वो करो।
क्योंकि अमृतसर के अजनाला थाने में जो हुआ, वो सिर्फ एक थाने पर हमला नहीं था। वो भारत पर हमला जैसा था । I repeat ये देश पर अटैक की तरह था। मुझे वो सेंटेंस याद आ रहा है कि पुलिस दे दो जी। मैं सब ठीक करके रख दूंगा। क्या खाक ठीक करके रख दिए। पंजाब में कल जो हुआ, उस पर पूरा देश चिंतित है। लेकिन तुर्रा देखिए, कल शाम को मान साहब पीसी करने आए..एक शब्द भी अजनाला कांड, अमृतपाल पर नहीं बोल पाए। लगता है किसी ने कह रखा हो, मुंह खोले तो समझ लेना।
दोस्तों तस्वीरें डरा नहीं रही, भयावह है। जिस तरह से खालिस्तान समर्थकों के आगे पुलिस सिस्टम सरेंडर करता जा रहा है पंजाब में, लोग कह रहे हैं कि ये तो पंजाब का मिजाज नहीं। पंजाब तो अराजकता और आतंक के सामने कभी सरेंडर नहीं करता। लेकिन अब डर ये है कि क्या पंजाब में फिर से खालिस्तान वाले 1980 के दशक की याद नहीं लौट आयी है?
दूसरी तरफ भगवंत मान सरकार को झुका देने वाला अमृतपाल सिंह अब मोदी सरकार पर निशाने साध रहा है। उसने कहा है कि केंद्र पंजाब सरकार को बदनाम कर सकती है। अमृतपाल ने कल ही ये धमकी भी दी थी कि जो हाल इंदिरा गांधी का हुआ था वो हाल अमित शाह का होगा।
सवाल ये है कि क्या खालिस्तानी गैंग का निशाना पंजाब सरकार नहीं मोदी सरकार है? 1980 के दशक में खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरावाले की वजह से पंजाब जल उठा था। वारिस पंजाब दी नाम के संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह की हैसियत भिंडरावाले जितनी तो नहीं है। लेकिन अमृतपाल जिस तरह से देश को चुनौती दे रहा है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमृतपाल सिंह पिछले साल दुबई से लौटा है। एक्टर-एक्टिविस्ट दीप सिद्धू की मौत के बाद वो उसके संगठन वारिस पंजाब दी का प्रमुख बन गया है।
जिस किडनैपिंग केस में अमृतपाल ने अपने साथी लवप्रीत सिंह तूफान को छुड़ाने के लिए थाने पर हमला किया, वो खुद उस मामले का एक आरोपी है।
अमृतपाल सिंह की मांगों के आगे झुक जाने वाली पंजाब सरकार की पुलिस की दलील है कि उन्हें किडनैपिंग केस में लवप्रीत के खिलाफ सबूत नहीं मिले। लेकिन सबूत नहीं मिलने की ये बात तब क्यों हुई जब थाने को बंधक बना लिया गया?
उधर पंजाब सरकार के मंत्री कहते हैं कि अमृतपाल ने थाने पर हंगामे के समय गुरु ग्रंथ साहिब सामने रखा था। बेअदबी ना हो इस वजह से टकराव से बचा गया। सुनिए पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा का ये बयान। पंजाब सरकार के मंत्री की बात आपने सुनी। अमृतपाल कैसे मोदी-शाह को धमका रहा है वो आपने सुनी।
कल दिल्ली में पवन खेड़ा की गिरफ्तारी के बाद ये नारे लगे थे कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी ..मोदी तेरी कब्र खुदेगी। दूसरी तरफ शाम होते-होते फारूक अब्दुल्ला साहब ने कह दिया कि पाकिस्तान से बात क्यों नहीं हो रही। पाकिस्तान से बात होनी चाहिए। आज हर बात पर पीएम ने रिप्लाई किया है। नॉर्थ ईस्ट की अपनी रैली में उन्होंने कहा है कि जो लोग कहते हैं कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी लेकिन ये देश हमारे साथ है। देश कह रहा है कि कब्र नहीं खुदेगी, कमल खिलेगा।
सवाल पब्लिक का
1. क्या पंजाब में भिंडरावाले पार्ट-2 की वापसी का डर है ?
2. पुलिस मांगने वाले केजरीवाल अमृतपाल कांड पर चुप क्यों हैं ?
3. क्या खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियां मोदी सरकार के लिए चुनौती बन गई हैं ?
4. क्या मोदी सरकार को चौतरफा घेरने के लिए एक इकोसिस्टम लगा हुआ है ?
