Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में चंपत राय के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी सामने आ रही है। उन्होंने सरकार और संघ के दबाब और पीएमओ के फरमान के बाद इस्तीफा दिया है। दरअसल, चंपत राय इस्तीफा नही देने पर अड़े रहे, लंबे समय तक मान मनौव्वल होता रहा। जब चंपत नहीं माने तब संघ और केंद्र सरकार ने सख्ती बरती जिसके बाद उन्हें झुकना पड़ा। चौतरफ दवाब के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया।
अब ट्रस्ट का पुनर्गठन!
केंद्र सरकार अब ट्रस्ट का पुनर्गठन करेगी। प्रधानमंत्री सोमवार को स्वदेश लौटने के बाद पूरे मामले में मंथन करेंगे। सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट में चंपत राय की जगह विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ले सकते हैं। विहिप सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे में अनियमितता की सूचना आने के बाद से ही चंपत और अनिल के स्वेच्छा से पद छोड़ने का इंतजार किया जा रहा था। ऐसा नहीं होने पर इन्हें दोनों ही ओर से पद छोड़ने का सीधा संदेश दिया गया।
हरिद्वार में बीते सप्ताह हुई विहिप की मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भी आमराय थी कि प्रतिष्ठा और संभावित नुकसान के मद्देनजर इन्हें पद छोड़ देना चाहिए। इसके बाद चंपत को बैठक में संतों और पदाधिकारियों की इच्छा से भी अवगत कराया गया। सूत्रों ने कहा कि संघ गड़बड़ी सामने आने के तत्काल बाद ही चंपत राय के इस्तीफे के पक्ष में था।
चंपत राय शुक्रवार रात तक पद नहीं छोड़ने पर अड़े थे। इसके बाद शनिवार को उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय और संघ की ओर से तत्काल पद छोड़ने का सख्त संदेश दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें यहां तक कहा गया कि पद नहीं छोड़ने की स्थिति में ट्रस्ट की ओर से उन्हें हटाने की सूचना सार्वजनिक की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि चंपत अब इसी महीने के अंत तक आने वाली एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मीडिया के समक्ष पक्ष रखेंगे।
जनवरी 2024 में अयोध्या राम मंदिर का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में अयोध्या राम मंदिर का उद्घाटन किया था। जब से मंदिर का उद्घाटन हुआ है, तभी से मंदिर में बड़ी मात्रा में चढ़ावा आ रहा है। साल 2024-25 मंदिर ट्रस्ट ने कुल 327 करोड़ रुपये की आमदनी की जानकारी दी, जिसमें से 153 करोड़ चढ़ावे के रूप में मिली।
कैसे हुआ चंदा चोरी का शक?
कथित चंदा चोरी को लेकर भले ही चर्चा अब हो रही हो, लेकिन इसको लेकर मंदिर ट्रस्ट को शक मई में ही हो गया था। मई के अंतिम सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा और दानपेटियों में औसत से कम चढ़ावा आने पर उन्हें शक हुआ। बस फिर क्या था, इस कथित चोरी को पकड़ने के लिए, जिस कमरे में दान पेटियां खोलकर गिनती होती थी और नोटों की गड्डियां बनती थी वहां हिडन कैमरे लगा दिए गए।
