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राज्यसभा चुनाव में ‘एक्स्ट्रा वोट’ का खेल, BJP-SP के बीच क्रॉस वोटिंग से कैसे बदल सकता है पूरा गणित?

उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाला चुनाव ‘एक्स्ट्रा वोट’ और क्रॉस वोटिंग के कारण बेहद दिलचस्प हो गया है। आरएलडी, एसबीएसपी और एनडीए के कुछ विधायकों का रुख अहम हो सकता है। 2024 में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद इस बार भी विधायकों के पाला बदलने पर नजर रहेगी।

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यूपी में राज्यसभा चुनाव हुआ दिलचस्प। (फोटो- टाइम्स नाउ नवभारत)
Authored by: शिव शुक्ला
Updated Sep 29, 2026, 19:31 IST
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उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश का राज्यसभा चुनाव सिर्फ 10 सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यहां ‘एक्स्ट्रा वोट’ और क्रॉस वोटिंग के गणित का बड़ा मुकाबला बनता दिख रहा है। बीजेपी नेतृत्व वाला एनडीए और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए विधायकों के आंकड़े साधने में जुटा है। कागज पर सीटों का गणित काफी हद तक साफ है, लेकिन असली पेच उन अतिरिक्त वोटों का है, जो एक उम्मीदवार को जीत की दहलीज पार करा सकते हैं। ऐसे में अगर क्रॉस वोटिंग हुई तो कुछ विधायकों के रुख से BJP की आठवीं और समाजवादी पार्टी की तीसरी सीट का पूरा समीकरण बदल सकता है।

पहले समझिए राज्यसभा चुनाव का गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा प्रभावी संख्या 397 है। जिसमें छह सीटें खाली हैं। ऐसे में 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने के कारण हर उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में पार्टियों के पास मौजूद कुल विधायकों के अलावा बचे हुए वोट सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इसे ऐसे समझना होगा मान लीजिए कि किसी गठबंधन के पास 74 वोट हैं तो वह दो उम्मीदवारों को तो आसानी से जिता सकता है, लेकिन उसके बाद बचे वोट तीसरे उम्मीदवार के लिए पर्याप्त हैं या नहीं, ये बड़ा सवाल होगा।

एनडीए के पास कितने वोट?

यूपी विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 289 विधायक हैं। इसमें बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, निषाद पार्टी के पांच, आरएलडी के नौ और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के छह विधायक शामिल हैं। इन आंकड़ों के आधार पर एनडीए सात उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में है। सात सीटों के लिए 259 वोट चाहिए, यानी उसके पास 30 वोट अतिरिक्त बचते हैं। आठवीं सीट के लिए उसे सात और वोटों की जरूरत होगी।

हालांकि,अगर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी एनडीए को मिलता है तो उसका आंकड़ा 294 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में सात सीटों के बाद 35 वोट बचेंगे और आठवीं सीट के लिए सिर्फ दो अतिरिक्त वोटों की जरूरत रह जाएगी। ऐसे में क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिल सकती है।

समाजवादी पार्टी के सामने तीसरी सीट की चुनौती

वहीं, समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले खेमे के पास 103 विधायक हैं। इसमें एसपी के 101 और कांग्रेस के दो विधायक शामिल हैं। 103 वोटों से सपा गठबंधन दो उम्मीदवारों को तो आसानी से राज्यसभा भेज सकता है। इसके बाद उसके पास 29 वोट बचेंगे। फिर उसे पास तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए 37 वोट चाहिए,यानी उसे आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में पार्टी की रणनीति एनडीए के भीतर संभावित असंतोष और क्रॉस वोटिंग पर भी निर्भर कर सकती है।

किसने कितने खरीदे नामांकन पत्र

UP में राज्यसभा के लिए सपा ने 3 नामांकन पत्र खरीदा है। वहीं भाजपा आठ उम्मीदवारों को उतार रही है। ऐसे में अब 10 वीं सीट पर चुनाव निर्विरोध नहीं होगा। इसके साथ ही चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिल सकती है।

क्रॉस वोटिंग क्यों बन सकती है सबसे बड़ा फैक्टर?

राज्यसभा चुनाव में विधायक अपनी पसंद के उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं। ऐसे चुनावों में जब दो प्रमुख खेमों के पास कई सीटें जीतने के बाद कुछ अतिरिक्त वोट बचते हैं,तब विपक्षी खेमे के कुछ विधायकों का दूसरी तरफ वोट करना समीकरण बदल सकता है।

2024 में हुई थी क्रॉस वोटिंग और बदल गया था गेम

यूपी में इसका बड़ा उदाहरण फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में देखने को मिला था। उस चुनाव में भाजपा ने सपा विधायकों द्वारा किए गए क्रॉस-वोटिंग के कारण अपेक्षित सात सीटों के बजाय आठ सीटें जीतकर सपा को चौंका दिया था। उस चुनाव से सबक लेकर समाजवादी पार्टी इस बार कोई खास रणनीति बना सकती है।

समाजवादी पार्ची की नजर आरएलडी और सुभासपा के विधायकों पर

ऐसे में इस बार समाजवादी पार्टी की कोशिश अपने पुराने सहयोगी रहे आरएलडी के विधायकों को अपने पक्ष में लाने की हो सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और आरएलडी के बीच गठबंधन था और तीन आरएलडी विधायक उस समय सपा के साथ गठबंधन का हिस्सा थे। इसके अलावा सुभासपा (SBSP) के कुछ विधायक भी एसपी की नजर में बताए जा रहे हैं। अब्बास अंसारी, जगदीश नारायण राय, दुधराम और हंसू राम जैसे नामों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है। हालांकि किसी विधायक का अंतिम रुख मतदान के समय ही स्पष्ट होगा।

एसपी की रणनीति केवल विपक्षी खेमे को मजबूत करने तक सीमित नहीं रह सकती। पार्टी एनडीए के भीतर उन विधायकों से भी संपर्क साधने की कोशिश कर सकती है जिन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर अनिश्चितता हो सकती है।

अपना दल (कमेरावादी) का रुख भी होगा अहम

इस राज्यसभा चुनाव में अपना दल (कमेरावादी) का रुख भी अहम होगा। सिराथू से विधायक पल्लवी पटेल का नाम भी इस चुनाव के संदर्भ में खूब चर्चा में है। उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव एसपी के टिकट पर जीता था। वहीं, हाल में अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात भी हुई है, ऐसे में चर्चा है कि दोनों के बीच संबंधों में तेजी से सुधार हो रहा है। दावा है कि अगर ऐसा होता है तो पल्लवी पटेल का रुख भी सपा की ओर हो सकता है।

BSP के लिए क्या बदलेगा?

इस चुनाव का एक बड़ा राजनीतिक पहलू बहुजन समाज पार्टी से जुड़ा है। बीएसपी के पास मौजूदा विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का अगस्त में निधन हो गया था। ऐसे में यूपी से बीएसपी के लिए राज्यसभा सदस्य चुनना संभव नहीं है। पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 2020 में बीजेपी के समर्थन से रामजी गौतम राज्यसभा पहुंचे थे। इस चुनाव के बाद यूपी से बीएसपी का राज्यसभा प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा।

किन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है?

यूपी से बीजेपी के आठ राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें बृज लाल, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा और दिनेश शर्मा शामिल हैं। दिनेश शर्मा पहले ही अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद इस्तीफा दे चुके हैं। एसपी के मौजूदा सदस्य और पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। वहीं बीएसपी के रामजी गौतम का कार्यकाल भी नवंबर में खत्म होगा।

16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव

चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है।

यहां है असली मुकाबला

कागज पर देखें तो एनडीए सात सीटें और एसपी गठबंधन दो सीटें जीतने की स्थिति में है। इसलिए आठवीं सीट एनडीए और तीसरी सीट एसपी के लिए सबसे अहम लड़ाई बनती है। एनडीए के लिए सवाल है कि उसके अतिरिक्त वोट कितने होंगे और क्या उसे बाहर से अपेक्षित समर्थन मिलेगा। एसपी के लिए चुनौती इससे भी बड़ी है, क्योंकि तीसरी सीट के लिए उसे अपने 29 अतिरिक्त वोटों के अलावा कम से कम आठ और वोट जुटाने होंगे।

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