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YouTube का बड़ा दावा: भारत की GDP में ₹18,000 करोड़ से ज्यादा का योगदान, 9.6 लाख लोगों को 'रोजगार'

YouTube का कहना है कि उसके क्रिएटर इकोसिस्टम ने साल 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया। ​​इसके साथ ही इस इकोसिस्टम ने देशभर में 9.6 लाख से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर रोजगार को सपोर्ट किया।

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YouTube के क्रिएटर इकोसिस्टम से 9.6 लाख नौकरियों को सपोर्ट/Photo- Youtube

यदि आपको लगता है कि YouTube से कंटेंट की ही कमाई होती है तो भाई साहब आपको अपने आंकड़े ठीक करने की जरूत है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि YouTube का कहना है कि उसके क्रिएटर इकोसिस्टम ने साल 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया।

इसके साथ ही इस इकोसिस्टम ने देशभर में 9.6 लाख से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर रोजगार को सपोर्ट किया। वीडियो बनाने का काम अब सिर्फ शौक या अतिरिक्त कमाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे मीडिया कंपनियां, प्रोडक्शन हाउस और रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

Google ने 29 सितंबर 2026 को अपने ब्लॉग में ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की ताजा रिपोर्ट के हवाले से ये आंकड़े साझा किए हैं। कंपनी के मुताबिक, भारत में डिजिटल वीडियो और कंटेंट क्रिएशन से जुड़ा कारोबार तेजी से एक संगठित इंडस्ट्री का रूप ले रहा है।

YouTube के क्रिएटर इकोसिस्टम से 9.6 लाख नौकरियों को सपोर्ट

YouTube के अनुसार, उसके क्रिएटिव इकोसिस्टम ने 2025 में भारत की GDP में ₹18,000 करोड़ से अधिक का योगदान दिया। इस दौरान देश में 9,60,000 से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर रोजगार को सपोर्ट मिला। इसमें सिर्फ वीडियो बनाने वाले क्रिएटर ही नहीं, बल्कि कैमरा ऑपरेटर, साउंड इंजीनियर, स्क्रिप्ट राइटर और प्रोडक्शन से जुड़े दूसरे पेशेवर भी शामिल हैं।

कंपनी का कहना है कि YouTube पर कमाई करने वाले क्रिएटर्स ने पिछले एक साल में 3 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को भी सपोर्ट किया। इससे छोटे शहरों में भी डिजिटल कंटेंट और मीडिया से जुड़े कौशल सीखने के अवसर बढ़ रहे हैं।

बेडरूम से शुरू हुआ चैनल, अब 35 लोगों की कंपनी

Google ने अपने ब्लॉग में SimpleGhar नाम के चैनल का उदाहरण दिया है। इसकी शुरुआत 2022 में एक बेडरूम से हुई थी। इसका मकसद भारतीय ग्राहकों को प्रोडक्ट के बारे में ईमानदार रिव्यू देकर खरीदारी के फैसले लेने में मदद करना था।

शुरुआत में इसके पास सिर्फ एक कैमरा था, लेकिन आज यह सात भाषाओं में वीडियो बनाने वाली मीडिया कंपनी बन चुकी है। कंपनी में 35 लोगों की पूर्णकालिक टीम काम करती है। यह उदाहरण दिखाता है कि YouTube पर कंटेंट बनाने का काम किस तरह एक व्यवस्थित बिजनेस में बदल सकता है।

छोटे शहरों के क्रिएटर्स को भी मिल रहे मौके

YouTube के मुताबिक, जयपुर, लखनऊ और कोच्चि जैसे गैर-मेट्रो शहरों में भी कंटेंट क्रिएशन से जुड़े समूह विकसित हो रहे हैं। इन जगहों पर स्थानीय प्रतिभाओं को वीडियो प्रोडक्शन और तकनीकी कौशल सीखने के अवसर मिल रहे हैं।

YouTube के क्रिएटर इकोसिस्टम से 9.6 लाख नौकरियों को सपोर्ट

YouTube के क्रिएटर इकोसिस्टम से 9.6 लाख नौकरियों को सपोर्ट

कंपनी का कहना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में बनाए जाने वाले वीडियो अब सिर्फ स्थानीय दर्शकों तक सीमित नहीं हैं। मराठी गायक संजू राठौड़ के गाने 'गुलाबी साड़ी' ने 50 करोड़ से ज्यादा व्यूज हासिल किए। यह उदाहरण क्षेत्रीय संगीत की व्यापक पहुंच को दिखाता है। YouTube के अनुसार, उसके चैनल रखने वाली 81% मीडिया कंपनियों का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म उन्हें दुनिया भर में नए दर्शकों तक पहुंचने में मदद करता है।

AI और नई तकनीक पर YouTube का जोर

Google ने बताया कि YouTube वीडियो बनाने और चैनल चलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए टूल्स पर काम कर रहा है। इनमें Shorts के लिए AI आधारित एडिटिंग और Ask Studio के जरिए चैनल मैनेजमेंट जैसे फीचर शामिल हैं।

कंपनी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और IICT के साथ AI आधारित क्रिएशन स्किलिंग को बढ़ावा देने तथा संस्कृति मंत्रालय के साथ पारंपरिक लोक और जनजातीय संगीत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके अलावा, AI से तैयार किए गए कंटेंट की पहचान और क्रिएटर्स की डिजिटल पहचान की सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।

भारत की 'ऑरेंज इकोनॉमी' में वीडियो कंटेंट की भूमिका

Google ने अपने ब्लॉग में भारत की क्रिएटिव इंडस्ट्री को 'ऑरेंज इकोनॉमी' का हिस्सा बताया है। इसमें रचनात्मकता, डिजिटल तकनीक और स्थानीय संस्कृति के मेल से आर्थिक गतिविधियां और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

हालांकि, ₹18,000 करोड़ से अधिक GDP योगदान और रोजगार के आंकड़े YouTube के क्रिएटर इकोसिस्टम से जुड़े हैं। ये पूरे भारत की क्रिएटर इंडस्ट्री के कुल आंकड़े नहीं हैं। कंपनी ने ये आंकड़े ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के हवाले से साझा किए हैं।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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