'गगनवीर' बनकर लौटे भारत के 'गौरव' शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष में जाने और आने की पूरी कहानी
- Edited by: संजीव कुमार दुबे
- Updated Jul 15, 2025, 05:42 PM IST
शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्री 18 दिन बाद स्पेस से पृथ्वी पर लौट आए हैं। 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने कैलिफोर्निया के समुद्र में लैंड किया।
शुभांशु शुक्ला समेत सभी अंतरिक्ष यात्री 20 दिन बाद स्पेस से पृथ्वी पर लौटे ((PHOTO @SpaceX ))
नई दिल्ली: चार दशकों के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान में भारत की वापसी कराने वाले ‘एक्सिओम-4 मिशन’ के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर गए चारों अंतरिक्ष यात्री मंगलवार को धरती पर सुरक्षित वापस लौट आए। आईएसएस पर जाने वाले पहले भारतीय, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 18-दिवसीय मिशन के दौरान सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण संबंधी अनेक प्रयोग किए। शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्री 18 दिन बाद स्पेस से पृथ्वी पर लौट आए हैं। 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने कैलिफोर्निया के समुद्र में लैंड किया। स्पेसएक्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "ड्रैगन के सुरक्षित उतरने की पुष्टि हो गई है। पृथ्वी पर आपका स्वागत है!"
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक मिशन की घोषणा से लेकर वापसी तक के महत्वपूर्ण क्षणों की समय-सीमा इस प्रकार है : भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुक्ला की भागीदारी वाले एक्सिओम-4 मिशन की घोषणा 2024 के अंत में इसरो और नासा द्वारा समर्थित एक सहयोगी वाणिज्यिक अंतरिक्ष उड़ान के रूप में की गई थी।
- मूल रूप से 2025 के शुरू में प्रक्षेपण के लिए निर्धारित इस मिशन को कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में तकनीकी जांच और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण कई बार स्थगित करना पड़ा।
- कई बार विलंब के बाद, मिशन को 25 जून, 2025 को फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया।
- चालक दल 26 जून 2025 को आईएसएस पर पहुंच गया तथा स्टेशन पर 18 दिन का प्रवास शुरू किया।
- मिशन के दौरान, शुक्ला ने सात भारतीय-डिज़ाइन वाले सूक्ष्म-गुरुत्व प्रयोगों का संचालन किया, जिनमें मूंग और मेथी के बीजों का अंकुरण, स्टेम सेल अनुसंधान और सूक्ष्म शैवाल अध्ययन शामिल थे।
- आईएसएस पर उन्होंने शून्य-गुरुत्वाकर्षण में जल के बुलबुले का प्रदर्शन किया और ‘स्क्रीन इंटरैक्शन’ से जुड़े संज्ञानात्मक भार प्रयोगों में भाग लिया।
- उन्होंने सपंर्क प्रयासों के तहत रेडियो और वीडियो लिंक के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, छात्रों और इसरो वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की।
- 13 जुलाई को ‘एक्सपीडिशन 73’ के चालक दल के सदस्यों के साथ विदाई समारोह आयोजित किया गया, जहां शुक्ला ने इसरो और अपने सहयोगियों को धन्यवाद दिया।
- ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान निर्धारित गतिविधियों और प्रयोगों को पूरा करने के बाद 14 जुलाई, 2025 को आईएसएस से अलग हुआ।
- शुक्ला और चालक दल के अन्य तीन सदस्य 15 जुलाई, 2025 को कैलिफोर्निया में समुद्र में सुरक्षित रूप से उतर गए, जिससे आईएसएस पर भारत का पहला विस्तारित अनुसंधान मिशन पूरा हो गया।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री के रूप में शुक्ला ने इतिहास रचा
शुक्ला ड्रैगन 'ग्रेस' अंतरिक्ष यान से लौटे हैं, जो सोमवार को शाम 4:45 बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से अलग हुआ। उनके साथ मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी हैं। ये सभी वाणिज्यिक एक्सिओम-4 मिशन का हिस्सा हैं। राकेश शर्मा के 1984 के मिशन के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री के रूप में शुक्ला ने इतिहास रच दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती उपस्थिति में एक और उपलब्धि जुड़ गयी।
मुस्कुराते हुए बाहर निकले शुभांशु शुक्ला
शुभांशु शुक्ला और ‘एक्सिओम-4 मिशन’ के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री मंगलवार को धरती पर लौटने के बाद ड्रैगन ‘ग्रेस’ अंतरिक्ष यान से मुस्कुराते हुए बाहर निकले तथा कैमरों की ओर हाथ हिलाते हुए लोगों का अभिवादन किया। शुक्ला (39), कमांडर पैगी व्हिटसन और मिशन विशेषज्ञ पोलैंड के स्लावोज़ उज्नान्स्की-विस्नीवस्की तथा हंगरी के टिबोर कापू को स्पेसएक्स के ‘ग्राउंड स्टाफ’ की मदद से अंतरिक्ष यान से बाहर निकलते हुए देखा गया।
7 दिन तक सभी यात्रियों की निगरानी होगी
अंतरिक्ष यान के नीचे उतरने के तुरंत बाद इसे ‘रिकवरी शिप शैनन’ तक ले जाया गया, जहां एक्सिओम-4 के चालक दल के सदस्य एक छोटी सी स्लाइड पर बाहर आए और ‘ग्राउंड स्टाफ’ कर्मियों ने उन्हें खड़े होने में मदद की।अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर तीन सप्ताह तक भारहीनता की स्थिति में रहने के बाद शुक्ला और तीनों अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठाने के लिए कदम उठाते हुए देखा गया। हेलीकॉप्टर से तट पर ले जाने से पहले एक्सिओम-4 के चालक दल की रिकवरी पोत पर ही चिकित्सा जांच की गई। चारों अंतरिक्ष यात्रियों को सात दिन तक निगरानी में रखा जाएगा।
एक्सिओम-4 मिशन भारत के लिए क्यों है खास
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक एक्सिओम-4 मिशन भारत के लिए इसलिए खास है, क्योंकि यह पहली बार है, जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर गया और वहां 60 प्रयोगों में हिस्सा लिया। इनमें से 7 प्रयोग इसरो ने डिजाइन किए थे, जो सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में किए गए। इन प्रयोगों में मूंग और मेथी जैसी फसलों का अंतरिक्ष में विकास, मानव शरीर पर शून्य गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव, और मानव-कंप्यूटर इंटरफेस का अध्ययन शामिल था। ये प्रयोग भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों, जैसे गगनयान और लंबी अवधि के अंतरिक्ष स्टेशन मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेंगे। (भाषा इनपुट)
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