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चीन के सैनिकों को भारतीय जवानों ने दे दी करारी शिकस्त, 'Tug of War' में ऐसे हासिल की जीत; देखें VIDEO

Tug of War: भारत और चीन के सैनिक टग ऑफ वॉर में आमने सामने थे, दोनों देशों के बीच बड़ा ही रोमांचक मुकाबला हो रहा था। इसमें चीनी सेना के जवानों को भारतीय सैनिकों ने पटखनी दे दी। इस शिकस्त के बारे में सेना के अधिकारी ने जानकारी साझा की है। साथ ही इस खेल का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

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भारत ने चीन को ऐसे दी शिकस्त।

Photo : Twitter

India vs China: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का मुद्दा लंबे समय से काफी ज्वलंतशील रहा है। देश की राजनीति में भी अक्सर चीन के मसले पर दो पक्षों के बीच तू तू मैं मैं का सिलसिला देखने को मिलता है। सरकार के खिलाफ विपक्ष तमाम आरोप लगाता है। इसी बीच चीनी सेना के जवानों को भारतीय सैनिकों ने टग ऑफ वॉर (रस्साकशी का खेल) में करारी शिकस्त दी है। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।

वायरल हो रहा चीन के हार का वीडियो

सोशल मीडिया पर भारतीय सैनिकों द्वारा चीन के जवानों को मिली शिकस्त का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि कैसे भारतीय सैनिकों ने चीन के जवानों को पहले धूल चटाई और फिर जश्न मना रहे हैं। भारतीयों में इस वीडियो को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। दरअसल, भारतीय सैनिकों और चीनी सैनिकों के बीच एक खेल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। ये उस वक्त हुआ जब संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन के तहत सूडान, अफ्रीका में तैनाती की गई। इसी खेल में भारत ने चीन को पटखनी दे दी।

रस्साकशी में चीनी सैनिकों को दी मात

पूरे खेल की वीडियोग्राफी भी हुई, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे भारतीय सैनिकों ने चीनी जवानों को शिकस्त दे दी। सेना के अधिकारी ने जानकारी साझा करते हुए ये कहा कि 'भारतीय सैनिकों ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अफ्रीका के सूडान में तैनाती के दौरान उनके और चीनी सैनिकों के बीच हुई रस्साकशी में जीत हासिल की।'

बता दें, संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन का मकसद युद्ध प्रभावित देशों में सतत सुरक्षा और शांति स्थापित करना है। जिसे (संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन) युद्ध को जल्द खत्म करने, नागरिकों की रक्षा करने और दीर्घकालीन शांति एवं सुरक्षा को समर्थन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के सैनिक, पुलिस और आम नागरिक इनमें शामिल होते हैं। जिन्हें ऐसे इलाकों में तैनात किया जाता है, जहां कोई अन्य देश या संस्था शांति स्थापित नहीं कर सकती है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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