भारत और जर्मनी ने हाल ही में एक हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम (OAS) बनाने के लिए साझा कार्यक्रम की घोषणा की है। इसे लेकर कहा जा रहा है कि इसके आने से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हो जाएगा। Helicopter Obstacle Avoidance एक हजार मीटर से भी ज्यादा दूर की बाधाओं का पता लगा सकता है।
हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस (OAS) के काम करने के बारे में बताते हैं कि हेलीकॉप्टर से लगातार लेजर बीम छोड़ी जाती हैं।यह बीम सामने मौजूद किसी वस्तु से टकराकर वापस आती है।सिस्टम उनके समय और दूरी को मापकर 3D मैप बना लेता है।इससे यह पतले तार (Wires) भी पहचान लेता है, जो सामान्य रडार नहीं पकड़ पाता।
कंप्यूटर सेंसर का डेटा एक शक्तिशाली ऑनबोर्ड कंप्यूटर को भेजा जाता है।यह कंप्यूटर-बाधा का आकार/दूरी/ दिशा/टक्कर के खतरे (Collision probability) का रियल-टाइम विश्लेषण करता है और यदि खतरा ज्यादा है, तो तुरंत चेतावनी देता है। यह पतले तार, केबल, पोल, टावर या भौगोलिक क्षेत्र का भी यह पता लगा लेता है।
हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम एक हजार मीटर से भी ज्यादा दूर की बाधाओं का पता लगा सकता है। वहीं यह धूल, बर्फ, धुंध, कोहरे और कम रोशनी में भी पायलट की मदद करेगा जिससे हेलीकॉप्टर में किसी भी तरह के खतरे का जोखिम घट जाएगा।
भारत की ओर से इसकी अगुवाई हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और जर्मनी की आंशिक रूप से सरकारी स्वामित्व वाली हेन्सोल्ड्ट (HENSOLDT) करेगी। यह बिल्ड टू स्पेक मॉडल पर साझा तौर पर बनाया जाएगा। इस डील में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को साझा करना और भारत में उत्पादन शामिल है।
बताते हैं कि सिस्टम तीन प्रकार के अलर्ट देता है: 1-Audio Warning, 2-'Obstacle ahead!' या बीपिंग अलार्म। 3- Visual Warning, कॉकपिट डिस्प्ले पर बाधा का सटीक स्थान दिखता है। मॉडल पायलट को कहता है:- 'Left turn / Climb / Descend' ताकि हेलीकॉप्टर सुरक्षित रास्ता ले सके।
बताया जा रहा है कि पहले इसे लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH)में लगाया जाएगा, फिर एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) में फिट होगा और बाद में अन्य प्लेटफॉर्म के लिए भी इस्तेमाल होंगे।