इंडियन एयरफोर्स के हेलिकॉप्टरों को अब 'तीसरी आंख' बनाएगी सुरक्षित, सेना की ताकत' में होगा और इजाफा

इंडियन एयरफोर्स के हेलीकॉप्ट कई दफा हादसे के शिकार भी हो जाते हैं। एयरफोर्स इससे बचने को लेकर तकनीक अपनाती हैं। वहीं इस बारे में बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है। भारत और जर्मनी ने एक हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम (OAS) बनाने के लिए कार्यक्रम का ऐलान किया है।यह हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम 1,000 मीटर से भी ज्यादा दूर की बाधाओं का पता लगाने में सक्षम है। बता दें कि हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम (Helicopter Obstacle Avoidance System) की भारत को सबसे ज्यादा जरूरत लद्दाख, सियाचिन, नॉर्थ-ईस्ट, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्रों में है। जानिए कैसे यह सिस्टम काम करता है और इंडियन एयरफोर्स की ताकत इसके आने के बाद कैसे कई गुना बढ़ जाएगी।

Authored by: रवि वैश्यUpdated Nov 21 2025, 15:44 IST
​हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम​01 / 07

​हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम​

भारत और जर्मनी ने हाल ही में एक हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम (OAS) बनाने के लिए साझा कार्यक्रम की घोषणा की है। इसे लेकर कहा जा रहा है कि इसके आने से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हो जाएगा। Helicopter Obstacle Avoidance एक हजार मीटर से भी ज्यादा दूर की बाधाओं का पता लगा सकता है।

​हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम कैसे करता है काम​Image Credit : फोटो साभार:Indian Air Force Facebook02 / 07

​हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम कैसे करता है काम​

हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस (OAS) के काम करने के बारे में बताते हैं कि हेलीकॉप्टर से लगातार लेजर बीम छोड़ी जाती हैं।यह बीम सामने मौजूद किसी वस्तु से टकराकर वापस आती है।सिस्टम उनके समय और दूरी को मापकर 3D मैप बना लेता है।इससे यह पतले तार (Wires) भी पहचान लेता है, जो सामान्य रडार नहीं पकड़ पाता। ​

​High-Resolution 3D Mapping​Image Credit : फोटो साभार:Indian Air Force Facebook03 / 07

​High-Resolution 3D Mapping​

कंप्यूटर सेंसर का डेटा एक शक्तिशाली ऑनबोर्ड कंप्यूटर को भेजा जाता है।यह कंप्यूटर-बाधा का आकार/दूरी/ दिशा/टक्कर के खतरे (Collision probability) का रियल-टाइम विश्लेषण करता है और यदि खतरा ज्यादा है, तो तुरंत चेतावनी देता है। यह पतले तार, केबल, पोल, टावर या भौगोलिक क्षेत्र का भी यह पता लगा लेता है।​

​हेलीकॉप्टर में किसी भी तरह के खतरे का जोखिम घट जाएगा​Image Credit : फोटो साभार:Indian Air Force Facebook04 / 07

​हेलीकॉप्टर में किसी भी तरह के खतरे का जोखिम घट जाएगा​

हेलीकॉप्टर ऑब्सटैकल अवॉयडेंस सिस्टम एक हजार मीटर से भी ज्यादा दूर की बाधाओं का पता लगा सकता है। वहीं यह धूल, बर्फ, धुंध, कोहरे और कम रोशनी में भी पायलट की मदद करेगा जिससे हेलीकॉप्टर में किसी भी तरह के खतरे का जोखिम घट जाएगा।​ ​

​यह बिल्ड टू स्पेक मॉडल पर साझा तौर पर बनाया जाएगा​Image Credit : फोटो साभार:Indian Air Force Facebook05 / 07

​यह बिल्ड टू स्पेक मॉडल पर साझा तौर पर बनाया जाएगा​

भारत की ओर से इसकी अगुवाई हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और जर्मनी की आंशिक रूप से सरकारी स्वामित्व वाली हेन्सोल्ड्ट (HENSOLDT) करेगी। यह बिल्ड टू स्पेक मॉडल पर साझा तौर पर बनाया जाएगा। इस डील में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को साझा करना और भारत में उत्पादन शामिल है।​

​सिस्टम तीन प्रकार के अलर्ट देता है (Pilot Warning System)​Image Credit : फोटो साभार:Indian Air Force Facebook06 / 07

​सिस्टम तीन प्रकार के अलर्ट देता है (Pilot Warning System)​

बताते हैं कि सिस्टम तीन प्रकार के अलर्ट देता है: 1-Audio Warning, 2-'Obstacle ahead!' या बीपिंग अलार्म। 3- Visual Warning, कॉकपिट डिस्प्ले पर बाधा का सटीक स्थान दिखता है। मॉडल पायलट को कहता है:- 'Left turn / Climb / Descend' ताकि हेलीकॉप्टर सुरक्षित रास्ता ले सके। ​ ​

​एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) में फिट होगा​Image Credit : फोटो साभार:Indian Air Force Facebook07 / 07

​एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) में फिट होगा​

बताया जा रहा है कि पहले इसे लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH)में लगाया जाएगा, फिर एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) में फिट होगा और बाद में अन्य प्लेटफॉर्म के लिए भी इस्तेमाल होंगे। ​ ​​

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