P-8I aircraft : भारत अपनी रक्षा तैयारी को ध्यान में रखते हुए अपनी सेना, वायु सेना और नौसेना को लगातार मजबूत बना रहा है। अब नौसेना की ताकत में और इजाफा करने के लिए भारत सरकार अमेरिका से छह अतिरिक्त P-8I पोसेडियन मैरिटाइम रिकॉनसा एयरक्राफ्ट खरीदने जा रही है। इन छह एयरक्राफ्ट की कीमत 3.5 अरब डॉलर है। ये सभी छह विमान फॉरेन मिलिट्री सेल्स रूट के जरिए खरीदे जाएंगे। भारत इस डील पर अमेरिका के साथ करीब एक साल से बातचीत करती आई है। इस डील का एक बड़ा मुद्दों उसकी कीमत है। अभी नौसेना के पास 12 P-8I एयरक्राफ्ट हैं।
प्रत्येक विमान की कीमत 500-600 मिलियन डॉलर
अमेरिका की बोइंग कंपनी P-8I विमानों का निर्माण करती है। उसने अब इन विमानों की कीमत बढ़ा दी है। भारत का कहना है कि एक विमान की कीमत 500-600 मिलियन डॉलर है जो कि बहुत ज्यादा है। भात ने अपनी नौसेना के लिए पहली बार जब आठ P-8I विमानों को खरीदा तो यह पूरी डील 2.1 अरब डॉलर में हुई थी। अब कीमत बढ़ने पर बोइंग का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखला में दिक्कतें आने की वजह से उसकी लागत काफी बढ़ गई है। ऐसे में अब छह विमान 3.5 अरब डॉलर या इससे अधिक कीमत में आएंगे। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि अब इस डील का नोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी के सामने मई में पेश किया जाएगा।
समुद्री निगरानी में होता है इन विमानों का इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने कहा, 'हम लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। हमने उनके साथ बातचीत भी की है, लेकिन कीमतें जैसी हैं वैसी ही हैं। और वे (बोइंग) इन्हें दूसरों को भी लगभग इसी कीमत पर बेच रहे हैं, इसलिए इसमें ज्यादा कुछ किया नहीं जा सकता। सप्लाई-चेन से जुड़ी समस्याएं भी अभी काफी बनी हुई हैं।' फिलहाल भारतीय नौसेना के पास 12 P-8I विमान हैं—पहले 8 विमान 2009 में खरीदे गए थे और फिर 2016 में 4 और जोड़े गए। नौसेना इनका इस्तेमाल समुद्री निगरानी के लिए करती है, और पांच साल पहले हिमालय में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ गतिरोध के दौरान इन्हें लद्दाख में निगरानी के लिए भी इस्तेमाल किया गया था। P-8I का उपयोग पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) और सतह पर मौजूद जहाजों के खिलाफ भी किया जा सकता है।
ठंडे बस्ते में स्ट्राइकर डील
इस विमान को P-8I कहा जाता है, जिसमें I का मतलब इंडिया है, क्योंकि इसमें भारतीय नौसेना की जरूरतों के अनुसार कई बदलाव किए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम इन्हें इसलिए ले रहे हैं क्योंकि इसका कोई विकल्प नहीं है। ऐसा कोई दूसरा विमान नहीं है जो एक साथ इतने सारे काम कर सके।' भारत के पास मौजूद ये 12 विमान अब तक काफी अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। जहां P-8I सौदा आगे बढ़ रहा है, वहीं भारत और अमेरिका के बीच चर्चा में रहा स्ट्राइकर बख्तरबंद वाहन फिलहाल 'ठंडे बस्ते' में चला गया है, क्योंकि सशस्त्र बल इसमें खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके अलावा, सेना अमेरिका के जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों की सीमित संख्या लेने की इच्छुक है, जिनमें से कुछ आपात खरीद के तहत पहले ही आ चुकी हैं।
