PM Modi Mauritius Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 साल बाद मॉरीशस की यात्रा पर जाने वाले हैं। वह मॉरीशस के नेशनल डे (11 मार्च) के मुख्य अतिथि हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के आपसी संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ सांस्कृतिक, सभ्यता और भाषायी स्तर पर एक दूसरे से जुड़े लोगों को और करीब लाएगी। 'मिनी इंडिया' के रूप में पहचान रखने वाला मॉरीशस हिंद महासागर में काफी अहम स्थान रखता है। इसकी भू-राजनीतिक स्थिति भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी की यह मॉरीशस यात्रा आपसी एवं वैश्विक नजरिए से कितनी महत्वपूर्ण है, इस बारे में मॉरीशस में भारत के राजदूत रहे संजय पंडा ने टाइम्स नाउ नवभारत की सुनीता आर्य झा से खास बातचीत की है।
सागर डॉक्टरिन ने रिश्ते को आगे बढ़ाया-पंडा
पूर्व राजदूत ने कहा, 'इस पूरे इलाके के विकास में भारत की सागर डॉक्टरिन की काफी अहम भूमिका है। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की मॉरीशस यात्रा के दौरान ही सागर डॉक्टरिन को अपनाया गया। तब से इस डॉक्टरिन के तहत कई अच्छे कार्य हुए हैं। इस डॉक्टरिन ने हिंद महासागर में एक तरह से भारत का एजेंडे और समुद्री सुरक्षा को मजबूती प्रदान की है। यह भारत के हिंद-प्रशांत रणनीति के अनुकूल भी है। पीएम मोदी की मॉरीशस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं। पीएम मोदी के पिछले दौरे के समय मॉरीशस में दूसरी सरकार थी। इस बार एक दूसरी सरकार और दूसरे पीएम हैं। भारत और मॉरीशस के सांस्कृतिक संबंध बहुत पुराने और गहरे हैं। सरकार चाहे जो भी है इस रिश्ते में किसी तरह का बदलाव नहीं होता। भारत और मॉरीशस का रिश्ता पार्टी और दलगत राजनीति से ऊपर है।'
मॉरीशस में भारत ने पूरी कीं कई परियोजनाएं
पंडा ने आगे कहा कि पिछले साल इस राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू मुख्य अतिथि थीं। यह दोनों देशों के बीच गहरे एवं मजबूत आपसी संबंधों को बताता है। मॉरीशस में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं। यहां के लोग संस्कृति, सभ्यता और भाषा के जरिए भारत के साथ गहरे अर्थों में जुड़े हैं। मॉरीशस में भारतीयता इतनी है कि इसे 'मिनी भारत' कहा जाता है। मॉरीशस के लोग भारत को अपना एक 'घर' के रूप में देखते हैं। हर साल बड़ी संख्या में लोग भारत घूमने के लिए आते हैं। लोगों के बीच आपसी संबंध काफी मजबूत हैं। मॉरीशस हिंद महासागर में ऐसी जगह स्थित है, वह जगह भू-राजनीति के लिहाज से भारत के लिए और खास बनाती है। जाहिर है कि अपनी इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी बीते 10 सालों में दोनों देशों के रिश्तों की समीक्षा करेंगे। 2015 के बाद मॉरीशस में भारत सरकार की मदद से कई परियोजनाएं शुरू हुईं। इसमें अगालेगा इंफ्रस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। यहां सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट बना, मेट्रो और हाउसिंग प्रोजेक्ट पर काम हुए हैं।
चीन को काउंटर करने में मॉरीशस अहम
उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भी भारत और मॉरीशस हमेशा एक साथ नजर आए हैं। भारत ने भी द्वीप के सेटलमेंट में मॉरीशस की कूटनीतिक मदद की है। जलवायु परिवर्तन, ब्लू इकॉनमी जैसे वैश्विक मुद्दों पर दोनों देश के बीच दोनों देश करीबी सहयोग है। हिंद महासागर में चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स के जरिए अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है, उसके इन चालों को काउंटर करने में मॉरीशस की एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।
